op sindoor भारत की स्वदेशी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन: रक्षा राज्य मंत्री
नई दिल्ली, 05 मई: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मंगलवार को कहा कि ‘op sindoor’ की सफलता ने स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों और प्रणालियों की प्रभावशीलता को साबित किया है और भारत की सैन्य शक्ति अब तेजी से घरेलू रक्षा निर्माण तंत्र पर आधारित हो रही है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए सशस्त्र बलों के “साहस और दृढ़ संकल्प” की सराहना की और कहा कि उन्हें उन्नत ‘मेड इन इंडिया’ उपकरणों का मजबूत समर्थन मिला।
उन्होंने कहा, “भारत की सैन्य ताकत हमारे रक्षा उद्योगों के कारखानों में तैयार हो रही है।” साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योग, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (msmes) के संयुक्त प्रयासों से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली है।
‘op sindoor’ का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि इस अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया और दुश्मन की साजिशों को नाकाम किया, जिसमें स्वदेशी तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उन्होंने कहा कि भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उत्पादन व निर्यात के बढ़ते आंकड़े यह दर्शाते हैं कि देश वैश्विक रक्षा बाजार में एक सक्षम खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। यह प्रगति आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार के प्रयासों का परिणाम है।
नवाचार की भूमिका पर जोर देते हुए संजय सेठ ने msmes को अर्थव्यवस्था की रीढ़ और स्टार्टअप्स को भविष्य की वृद्धि का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि ये विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने लगातार तकनीकी प्रगति की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों के बीच उद्योग को हमेशा आगे रहना होगा। उन्होंने सभी हितधारकों से अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने और उभरते क्षेत्रों की खोज करने का आह्वान किया।
मंत्री ने उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे रक्षा क्षेत्र को मजबूती मिली है और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने सशस्त्र बलों और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि बदलती परिचालन आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वतंत्रता और तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित होगी।
भारतीय सेना के उत्तरी और केंद्रीय कमानों तथा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय संगोष्ठी का विषय “रक्षा त्रिवेणी संगम – जहां तकनीक, उद्योग और सैनिक एक साथ आते हैं” है।
इस कार्यक्रम में निजी रक्षा निर्माता, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थान भाग ले रहे हैं, जहां मानव रहित हवाई वाहन, ड्रोन, काउंटर-यूएवी सिस्टम और निगरानी उपकरण जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।