कड़े प्रवर्तन, तेज़ अभियोजन और मजबूत पुनर्वास से ही नशे पर लगेगी रोक: cs
श्रीनगर, 05 मई: नारको कोऑर्डिनेशन सेंटर (ncord) की 17वीं केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैठक आज मुख्य सचिव अतल डुल्लू की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें नशा विरोधी कानूनों के कड़े प्रवर्तन, अपराधियों के अभियोजन और नशा प्रभावित लोगों के उपचार व पुनर्वास की समीक्षा की गई।
बैठक में पुलिस महानिदेशक, अभियोजन महानिदेशक, प्रधान सचिव (गृह), प्रशासनिक सचिव, मंडलायुक्त जम्मू/कश्मीर सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जबकि सभी जिलों के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने ndps मामलों के निपटान में कानूनी ढांचे को मजबूत करने और प्रक्रियागत खामियों को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कानून विभाग को निर्देश दिया कि सेवा में कार्यरत गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दर्ज करने की संभावना तलाशें, ताकि सुनवाई में देरी न हो। उन्होंने ndps मामलों में बरी होने के मामलों का विश्लेषण कर जिम्मेदारी तय करने को भी कहा।
उन्होंने नशा तस्करी के मामलों में आगे और पीछे के नेटवर्क की जांच करने और जमानत आदेशों को चुनौती देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अपराधियों में डर पैदा हो। उन्होंने ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए स्पष्ट रणनीति अपनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने गैर-प्रवर्तन उपायों जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और वाहन पंजीकरण रद्द करने तथा बैंक खातों की जांच कर अवैध कमाई पर रोक लगाने की बात भी कही।
उन्होंने पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षित काउंसलरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
imhans को प्रत्येक जिले में 3-4 प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर तैयार करने और नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया।
उपायुक्तों को निर्देश दिए गए कि जिला अस्पतालों में नशा मुक्ति केंद्रों की ipd सेवाएं सुचारु रूप से चलें और स्वास्थ्य विभाग आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करे।
बैठक में ndps अधिनियम की धारा 52a के तहत जब्त वाहनों के मामलों में सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
इस अवसर पर आयुक्त सचिव (कानून) अचल सेठी ने ndps मामलों की स्थिति, लंबित मामलों और उनके निपटान में देरी पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
वहीं igp अपराध सारा रिज़वी ने वर्ष 2026 के दौरान की गई कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 542 ndps मामले दर्ज किए गए, 716 लोगों को गिरफ्तार किया गया और करीब 640 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जिनकी कीमत लगभग 18.49 करोड़ रुपये है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष वाणिज्यिक मात्रा वाले मामलों में वृद्धि हुई है, जहां 31 मामले दर्ज किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 19 मामले थे।
बैठक में बताया गया कि कुल 10,956 ndps मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं, जिनमें से 6,156 मामले पांच विशेष ndps अदालतों में हैं। 2025 में 1,991 मामले दर्ज हुए, जबकि 483 मामलों का निपटारा हुआ।
अभियोजन ने 2025 में 91 और 2026 में अब तक 57 जमानत आदेशों को चुनौती दी है।
दोष सिद्धि के आंकड़े 2024 में 135, 2025 में 140 और 2026 में अब तक 23 रहे हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि 1,435 गवाहों में से 839 के बयान दर्ज हुए, जबकि 596 गवाह बिना बयान के लौट गए, जिससे प्रक्रियागत सुधार की आवश्यकता सामने आई।
इसके अलावा 24 मामलों में ड्रग नेटवर्क की कड़ियां स्थापित कर 53.77 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई और 22.63 लाख रुपये के बैंक खाते फ्रीज किए गए।
गैर-प्रवर्तन उपायों के तहत जनवरी से मार्च के बीच 489 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने और 700 वाहन पंजीकरण निलंबित करने की सिफारिश की गई।
बैठक में नशा नियंत्रण के लिए कड़े प्रवर्तन, प्रभावी पुनर्वास और मामलों के त्वरित निपटान पर जोर दिया गया, ताकि अपराधियों को कड़ी सजा मिल सके और नशा तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।