वन्यजीव विभाग मानव–जंगली सूअर संघर्ष से निपटने के लिए उठा रहा कदम: जावेद राणा
**जम्मू, 28 मार्च:** वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री जावेद अहमद राणा ने आज जानकारी दी कि वन्यजीव संरक्षण विभाग ने दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास, विशेषकर न्यू थीड गांव में, मानव–जंगली सूअर संघर्ष को प्रभावी और त्वरित तरीके से कम करने के लिए कई उपाय किए हैं।
मंत्री विधान सभा में अली मोहम्मद सागर की ओर से सलमान अली सागर द्वारा प्रस्तुत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे।
मंत्री ने बताया कि संघर्ष को कम करने के प्रयासों के तहत, मौजूदा चेन-लिंक फेंसिंग के साथ लगभग 3 किलोमीटर लंबाई में सीमेंट-कंक्रीट की टो वॉल बनाई गई है, ताकि जंगली सूअर बाड़ के नीचे सुरंग बनाकर अंदर न आ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास नियमित रूप से एंटी-प्लास्टिक और स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे ऐसा कचरा हटाया जा सके जो जंगली सूअरों को आकर्षित करता है।
उन्होंने आगे बताया कि दाचीगाम कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे कार्यरत है, ताकि पार्क के बाहर जंगली सूअरों के दिखने की घटनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
मंत्री ने कहा कि मानव–जंगली सूअर संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन के कारण दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान और इसके आसपास, विशेषकर न्यू थीड गांव में, अब तक किसी भी मानव के घायल होने की सूचना नहीं मिली है।
उन्होंने यह भी बताया कि सीमावर्ती गांवों, विशेषकर किसानों के लिए नियमित सलाह और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा नियमित गश्त की जा रही है और जरूरत पड़ने पर शोर करने वाली बंदूकें और पटाखों का उपयोग कर जंगली सूअरों को गांवों में प्रवेश करने से रोका जाता है।
जवाब में यह भी बताया गया कि जंगली सूअर (Sus scrofa) कश्मीर के पर्यावरण, विशेषकर दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में, एक बाहरी आक्रामक प्रजाति है, जिसे महाराजा गुलाब सिंह (1846–1857) के शासनकाल में शिकार के उद्देश्य से यहां लाया गया था।
यह भी जानकारी दी गई कि हंगुल की आबादी का आकलन विभाग द्वारा हर दो वर्ष में किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में हंगुल की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है—2015 में 183 से बढ़कर 2017 में 214, 2019 में 237, 2021 में 261, 2023 में 289 और 2025 में 323 हो गई है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जंगली सूअरों की बढ़ती संख्या का दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में हंगुल की वृद्धि पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है