जावेद राणा ने मेंढर में बाढ़ राहत एवं बहाली कार्यों की समीक्षा की

बाढ़ सुरक्षा तटबंधों की तत्काल मरम्मत और नुकसान के शीघ्र आकलन के दिए निर्देश

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मेंढर, 23 जुलाई: जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी, पर्यावरण एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने आज मेंढर में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बहाली और पुनर्वास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

अधिकारियों ने मंत्री को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान, आवश्यक सेवाओं की बहाली, राहत कार्यों तथा नुकसान के आकलन की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी।

मंत्री ने अधिकारियों को बहाली कार्यों में तेजी लाने, प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने तथा सामान्य स्थिति जल्द बहाल करने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।

जावेद राणा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों द्वारा प्रस्तुत सभी आवश्यक दस्तावेजों को प्राप्त कर उनकी जांच की जाए, ताकि सभी वास्तविक मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार राहत, मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जा सके।

प्रभावित लोगों को संबोधित करते हुए मंत्री ने उनसे नुकसान के सही आकलन में प्रशासन का पूरा सहयोग करने की अपील की। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार प्रत्येक पात्र मामले की संवेदनशीलता के साथ जांच करेगी और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएगी।

मंत्री ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को मनकोट नाले तथा अन्य प्रभावित स्थानों पर क्षतिग्रस्त बाढ़ सुरक्षा तटबंधों की तत्काल मरम्मत करने के निर्देश दिए। उन्होंने मौके पर ही विभाग को बाढ़ से प्रभावित सभी स्थलों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश भी दिए, जिसमें तत्काल राहत के लिए अस्थायी बहाली कार्यों के साथ-साथ भविष्य में बाढ़ से सुरक्षा के लिए स्थायी उपाय भी शामिल हों।

उन्होंने जिला प्रशासन और सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ सभी आवश्यक सेवाओं की तत्काल बहाली सुनिश्चित करने तथा नुकसान के आकलन में तेजी लाकर प्रत्येक प्रभावित परिवार तक बिना किसी देरी के राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।


जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी, पर्यावरण एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने आज पुंछ जिले के मेंढर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक दौरा कर हाल ही में हुई भारी वर्षा और फ्लैश फ्लड से हुए नुकसान का जायजा लिया तथा राहत, बहाली और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की।

दौरे के दौरान मंत्री के साथ उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) मेंढर इमरान कटारिया तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने छज्जला, मनकोट, डबराज, बलनोई, भाटीधार और सलवाह सहित कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

मंत्री ने प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं, नुकसान और तत्काल आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि इस कठिन समय में सरकार पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है तथा राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन बहाल करने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान की जाएगी।

जावेद राणा ने कहा, “हम सब इस कठिन समय में एक साथ हैं। हाल की बाढ़ ने पीर पंजाल क्षेत्र में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और निजी संपत्तियों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है और तब तक चैन से नहीं बैठेगी, जब तक सभी प्रभावितों तक राहत नहीं पहुंच जाती, क्षतिग्रस्त ढांचे की बहाली नहीं हो जाती और पूरे जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती।”

उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सामान्य स्थिति जल्द बहाल करने तथा सार्वजनिक ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

मंत्री ने कहा कि फ्लैश फ्लड से हुई तबाही ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाना आवश्यक है। उन्होंने बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, वैज्ञानिक ढंग से ढलानों को स्थिर करने, आपदा तैयारी को सुदृढ़ बनाने तथा टिकाऊ आपदा न्यूनीकरण उपाय अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

दौरे के दौरान स्थानीय लोगों ने मंत्री को बाढ़ से हुई भारी तबाही और प्रभावित समुदायों को हुए व्यापक नुकसान की जानकारी दी।

मंत्री ने कहा, “इस संकट की घड़ी में हम प्रभावित लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। प्रशासन तत्काल राहत, क्षतिग्रस्त ढांचे की शीघ्र बहाली और प्रत्येक प्रभावित परिवार के समग्र पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही हमें ऐसे दीर्घकालिक उपाय भी अपनाने होंगे, जिनसे भविष्य में हमारे संवेदनशील क्षेत्र इस प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का बेहतर ढंग से सामना कर सकें।”

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