पाकिस्तान की ड्रोन-नार्कोटिक्स साजिश

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यह चिंताजनक है कि पाकिस्तान लगातार जम्मू-कश्मीर की बुनियाद को कमजोर करने के लिए नए और खतरनाक षड्यंत्र रच रहा है तथा वहां अशांति फैलाने के लिए भारी धन खर्च कर रहा है। अपने ताज़ा अवैध प्रयास में इस दुष्ट देश ने नशीले पदार्थों, विशेष रूप से लगभग 12 करोड़ रुपये मूल्य की हेरोइन की एक बड़ी खेप भेजी है। यह एक बड़े और अधिक खतरनाक षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होती है, जिसका उद्देश्य युवाओं के भविष्य को बर्बाद करना, समाज को कमजोर करना, आतंकवादी नेटवर्क को वित्तीय सहायता देना और शांति व्यवस्था को बाधित करना है। जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की तस्करी करके पाकिस्तान युवाओं को नुकसान पहुँचाने, नशे की लत फैलाने और अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्र-विरोधी तत्वों को समर्थन देने की कोशिश कर रहा है।

 

पाकिस्तान की यह साजिश एक बार फिर तब सामने आई जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ संयुक्त अभियान में जम्मू जिले के बिश्नाह क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में बहादुरपुर गांव के बाहरी इलाके में स्थित कृषि खेतों से लगभग 12 करोड़ रुपये मूल्य के उच्च गुणवत्ता वाले नशीले पदार्थ बरामद किए। आशंका है कि यह खेप ड्रोन के माध्यम से गिराई गई थी। बरामदगी का स्थान भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह चिंताजनक प्रवृत्ति इस बात को रेखांकित करती है कि सुरक्षा बलों के बीच मजबूत समन्वय, अधिक सतर्कता और आम जनता में जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है ताकि ऐसे नापाक मंसूबों को विफल किया जा सके।

 

यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान भारत को अस्थिर करने के लिए इस तरह की गतिविधियों को वित्तीय सहायता दे रहा है, ताकि युवा पीढ़ी का भविष्य बर्बाद हो सके। उसने कथित तौर पर सीमा के इस पार ऐसे लोगों का एक नेटवर्क भी तैयार किया है, जो इन अवैध खेपों को इकट्ठा करते हैं और युवाओं के बीच बेचते हैं। इस अवैध व्यापार से अर्जित धन का उपयोग बाद में अशांति फैलाने में किया जाता है। इस प्रकार पाकिस्तान एक ही रणनीति से कई उद्देश्यों को साधने की कोशिश कर रहा है।

 

सीमा सुरक्षा बल और पुलिस की सतर्क टीमों की सराहना करनी होगी कि उन्होंने ऐसी कई खेपों को उन लोगों तक पहुँचने से पहले ही बरामद कर लिया, जिनके लिए ये भेजी गई थीं। यदि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त न किए जाते, तो इससे न केवल कई युवाओं और परिवारों का जीवन बर्बाद हो सकता था बल्कि देश की प्रगति की संभावनाओं पर भी गंभीर आघात पड़ता।

 

पाकिस्तान की इन खतरनाक योजनाओं को देखते हुए यह आवश्यक हो जाता है कि सीमा के पास संदिग्ध क्षेत्रों में निगरानी और अधिक मजबूत की जाए। हालांकि सीमा क्षेत्र बहुत विस्तृत है और हर स्थान पर हर समय भौतिक रूप से निगरानी रखना संभव नहीं है।

 

इसलिए ड्रोन को सीमा पार से प्रवेश करने से रोकने के लिए तकनीक का उपयोग सबसे प्रभावी उपाय प्रतीत होता है। यह आवश्यक है कि सरकार देश की प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थाओं जैसे DRDO, IIT आदि को इस दिशा में शामिल करे और उनके वैज्ञानिकों तथा छात्रों से ऐसे सिस्टम विकसित करने को कहे जो दुश्मन क्षेत्र से आने वाले कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन की पहचान और निगरानी कर सकें, तथा उन्हें प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करने के उपाय भी सुझा सकें ताकि वे भविष्य में ऐसी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम न दे सकें।

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