**ध्वज संहिता उल्लंघन**

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देशभर में समय-समय पर ऐसे अनेक मामले सामने आते रहते हैं, जिनमें लोग अनजाने में राष्ट्रीय ध्वज संहिता के नियमों का उल्लंघन कर तिरंगे का अनादर कर बैठते हैं।

 

इसी संदर्भ में, खबर है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डोडा जिले में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इस घटना का तुरंत संज्ञान लिया, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज के अनादर का मामला सामने आया।

 

इस मामले में आरोपी व्यक्ति अपने घर की खिड़की के शीशे को तिरंगे से साफ करता हुआ दिखाई दे रहा था। यह कृत्य प्रथम दृष्टया ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ की धारा 2 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, जो राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले किसी भी कार्य को सख्ती से प्रतिबंधित करता है।

 

ऐसे मामलों को देखते हुए यह आवश्यक हो जाता है कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएँ, क्योंकि कई बार लोग कानून की जानकारी के अभाव में ऐसी गलतियाँ कर बैठते हैं। इस कानून के बारे में विद्यालयों में शिक्षा दी जानी चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अज्ञानता के आधार पर बहाना न बना सके।

 

इस विशेष मामले में पुलिस को निष्पक्ष और गहन जांच करनी चाहिए तथा यदि तिरंगे का जानबूझकर अपमान करने का प्रयास सिद्ध होता है, तो दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ताकि यह एक उदाहरण बने और ऐसी मानसिकता रखने वाले अन्य लोगों को भी ऐसा कृत्य दोहराने से रोका जा सके।

 

यह उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय ध्वज केवल एक कपड़ा नहीं है, बल्कि यह भारत की महानता का प्रतीक है। इसलिए देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह इसे सर्वोच्च सम्मान प्रदान करे।

 

यह भी महत्वपूर्ण है कि व्यापक जागरूकता अभियानों के माध्यम से अनजाने में होने वाले उल्लंघनों को रोका जा सकता है और लोगों को कानून का उल्लंघन करने के कारण उत्पन्न होने वाली कठिन परिस्थितियों से बचाया जा सकता है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता को राष्ट्रीय ध्वज के उचित उपयोग और संभाल के संबंध में शिक्षित करे, क्योंकि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।

 

ऐसे मामलों में अधिकारियों को अनजाने में हुई गलतियों के प्रति उदार रुख अपनाना चाहिए और दोषियों को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए, बशर्ते वे भविष्य में ऐसा कार्य न दोहराएँ। लेकिन जो लोग जानबूझकर तिरंगे का अपमान करते हैं, उनके साथ कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाना चाहिए, ताकि राष्ट्र की गरिमा बनी रहे।

 

जागरूकता और सख्त कानून प्रवर्तन साथ-साथ चलने चाहिए। तभी हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश और देशभर में तिरंगे का सम्मान अक्षरशः और भावनात्मक रूप से सुरक्षित रहे।

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