उफनती तवी और जम्मू के रिवरफ्रंट का भविष्य**

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तवी नदी में जलस्तर की वर्तमान स्थिति ने एक बार फिर तवी रिवरफ्रंट परियोजना की व्यवहारिकता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अमरनाथ यात्रा समाप्त होने तक तवी नदी में नौकायन सुविधा उपलब्ध कराने की योजना के विपरीत फिलहाल नौका संचालन बंद कर दिया गया है। नदी की मौजूदा खतरनाक स्थिति को देखते हुए मानसून के दौरान इसकी अनिश्चित प्रवृत्ति के कारण इस सुविधा को दोबारा शुरू करना उचित नहीं होगा। तवी के जल प्रवाह की अनिश्चितता को देखते हुए अब संबंधित प्राधिकरण के लिए अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना आवश्यक हो गया है।

देश के कई अन्य स्थानों पर विकसित किए गए रिवरफ्रंट परियोजनाओं की तुलना में तवी नदी का मामला अलग है। अधिकांश स्थानों पर कृत्रिम सहायक जलधाराओं और नियंत्रित जल प्रवाह प्रणाली के माध्यम से रिवरफ्रंट विकसित किए गए हैं, जबकि तवी रिवरफ्रंट का निर्माण सीधे नदी के भीतर किया गया है। ऐसे में जलस्तर को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है और विशेषकर जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के दौरान यह स्थिति अधिक खतरनाक बन जाती है। यह स्पष्ट रूप से परियोजना की एक बड़ी कमी है। इसलिए इस समस्या का समाधान खोजने और तवी नदी को पूरे वर्ष पर्यटन के लिए उपयुक्त बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक अध्ययन कराया जाना चाहिए।

मौजूदा हालात ने निश्चित रूप से नीति-निर्माताओं को इस बात पर विचार करने के लिए मजबूर किया होगा कि क्या तवी रिवरफ्रंट परियोजना की योजना बनाते समय मौसमी बाढ़ और पर्यावरणीय परिस्थितियों का पर्याप्त आकलन किया गया था। वास्तविकता यह है कि जलवायु परिवर्तन ने पारंपरिक मौसम चक्र को बदल दिया है। लगातार हो रहे बादल फटने की घटनाओं, अत्यधिक वर्षा और अचानक आने वाली बाढ़ ने नदी के व्यवहार संबंधी पुराने आकलनों को अविश्वसनीय बना दिया है।

तवी रिवरफ्रंट परियोजना से जुड़े सभी पक्षों को अब इसकी रूपरेखा की पुनः समीक्षा करनी चाहिए और ऐसा स्थायी समाधान तलाशना चाहिए जिससे यह परियोजना बाढ़ के प्रभाव से सुरक्षित रह सके तथा आसपास रहने वाले लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। शहरी विकास योजनाकारों को यह समझना होगा कि विकास तभी सार्थक है जब वह सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़े। तवी नदी में वर्तमान बाढ़ की स्थिति को केवल एक चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि समय रहते कमियों को दूर करने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए, ताकि भविष्य में यह समस्या और अधिक गंभीर रूप न ले।

समय की मांग है कि विशेषज्ञों की सलाह लेकर इस परियोजना की दोबारा समीक्षा की जाए और ऐसे व्यावहारिक समाधान लागू किए जाएं, जिनसे यह परियोजना पूरे वर्ष पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहे तथा किसी भी प्रकार के जोखिम और खतरे से मुक्त हो। यह निश्चित है कि यदि दूरदर्शिता, तकनीकी मजबूती और सकारात्मक सोच के साथ इस परियोजना में आवश्यक सुधार किए जाएं, तो तवी रिवरफ्रंट सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन से समझौता किए बिना पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक सुरक्षित, आकर्षक और सफल पर्यटन स्थल बन सकता है।

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