**लद्दाख भारत का पहला एआई राज्य बनने की क्षमता रखता है: उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता
**लेह, 11 फरवरी: लद्दाख के माननीय उपराज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने आज लद्दाख की उस क्षमता पर जोर दिया, जिसके आधार पर वह भारत का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) राज्य बन सकता है और सतत एवं समावेशी विकास का मॉडल प्रस्तुत कर सकता है।
उपराज्यपाल आईटी विभाग, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख द्वारा आयोजित प्री-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट 2026 को संबोधित कर रहे थे।
देशभर से आए प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए श्री कविंदर गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में नई दिल्ली में अब तक का सबसे बड़ा एआई शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन विश्वभर के आईटी एवं तकनीकी विशेषज्ञों, नवप्रवर्तकों और पेशेवरों को एक मंच पर ला रहा है, जो भारत के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित एआई के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन लद्दाख की रणनीति को आगामी राष्ट्रीय एआई शिखर सम्मेलन, डिजिटल इंडिया विजन और इंडिया एआई मिशन के साथ संरेखित करने का महत्वपूर्ण मंच है। यह समिट समावेशी विकास और सतत प्रगति के लिए एआई के उपयोग की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भारत की राष्ट्रीय एआई नीति में लद्दाख की भूमिका को मजबूत करता है।
उपराज्यपाल ने जोर देकर कहा कि एआई को जन-केंद्रित रहना चाहिए, जिससे नागरिक सशक्त हों, सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत हो तथा समावेशी विकास को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा, “तकनीक लोगों की सेवा के लिए होनी चाहिए, न कि लोग तकनीक के लिए।”
श्री गुप्ता ने बताया कि एआई सतत पर्यटन, कृषि/पशुपालन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा एवं कौशल विकास, ऊर्जा एवं जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, बुनियादी ढांचा, सुशासन, नागरिक सेवाएं तथा अंतरिक्ष/खगोल विज्ञान जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक समाधान प्रदान कर सकता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता और सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी।
उन्होंने कहा कि लद्दाख भौगोलिक रूप से दूरस्थ लेकिन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील लेकिन प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है। पारंपरिक विकास मॉडल यहां सीमित साबित होते हैं, लेकिन एआई इन चुनौतियों को अवसरों में बदल सकता है।
उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख की लगभग 60 प्रतिशत आबादी युवा है और एआई उनके लिए नवाचार, कौशल विकास, उद्यमिता और आर्थिक प्रगति के नए अवसर खोल सकता है। उन्होंने बताया कि लद्दाख की ठंडी जलवायु ऊर्जा-कुशल एआई डेटा सेंटर के लिए प्राकृतिक लाभ प्रदान करती है, जबकि सौर, जल, भू-तापीय और हाइड्रोजन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत उन्नत एआई अवसंरचना को न्यूनतम कार्बन प्रभाव के साथ संचालित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क नेटवर्क और राष्ट्रीय मिशनों के साथ तालमेल के कारण लद्दाख का प्रशासनिक ढांचा व्यवसाय और नवाचार के अनुकूल है। हालांकि, उच्च गति डेटा कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। उन्होंने लद्दाख में एआई उत्कृष्टता केंद्र (AI Centre of Excellence) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जो स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करे, डेटा मानक स्थापित करे और उच्च हिमालयी एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए वैश्विक मॉडल बने।
अपने संबोधन के अंत में श्री कविंदर गुप्ता ने सरकार, उद्योग, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के बीच सहयोग का आह्वान किया और कहा कि लद्दाख केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि एआई समाधान का निर्माता बने, जो सुशासन को सुदृढ़ करे, नागरिकों को सशक्त बनाए और क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित रखे। उन्होंने कहा, “लद्दाख का भविष्य स्वयं नहीं बनेगा; आज से मिलकर हम इसे गढ़ेंगे।”
इससे पूर्व उपराज्यपाल ने पारदर्शी और कुशल प्रशासनिक सेवाओं के लिए ई-सेवा मॉडल और विलेज असेसमेंट मॉड्यूल पोर्टल का शुभारंभ किया।
मुख्य सचिव श्री आशीष कुंद्रा ने उपराज्यपाल की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एआई को “इस सदी में मानवता के लिए कोड लिखने वाला” बताया है। उन्होंने एआई के अत्यधिक उपयोग से सोचने की क्षमता और रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा करते हुए प्राकृतिक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रशासनिक सचिव (आईटी) श्रीमती शशांका अला ने बताया कि यह समिट नई दिल्ली में आयोजित होने वाले मुख्य एआई इम्पैक्ट समिट की प्रस्तावना है। उन्होंने एआई इन गवर्नेंस, शिक्षा में एआई, नवाचार अवसंरचना, सुलभ एवं कुशल स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन में एआई उपयोग आदि विषयों पर सत्रों की जानकारी दी। उन्होंने तीन प्रमुख स्तंभों—सरकारी प्रक्रियाओं का पुनर्गठन, जलवायु-सहिष्णु हरित प्लेटफॉर्म और समावेशी एज एआई समाधान—तथा 2026 तक के अपेक्षित परिणामों का भी उल्लेख किया।