**अदालती देरी से परे न्याय**
राष्ट्रीय लोक अदालतें वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्रों में से एक प्रभावशाली व्यवस्था हैं, जो उन लोगों को बड़ी राहत प्रदान करती हैं जो न्यायालयों में लंबित मामलों या पूर्व-विवाद चरण के विवादों का सामना कर रहे हैं। इन मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान एक ही दिन में बिना किसी परेशानी और अधिक धन खर्च किए किया जा सकता है। यह सुविधा National Legal Services Authority (NALSA) तथा अन्य विधिक सेवा संस्थाओं जैसे J&K Legal Services Authority और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSAs) द्वारा प्रदान की जाती है।
लोक अदालतों को **विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987** के अंतर्गत अधिकार प्राप्त हैं और इसलिए इन अदालतों द्वारा दिए गए निर्णयों को दीवानी न्यायालय के डिक्री के समान माना जाता है। इनका निर्णय अंतिम और सभी पक्षों पर बाध्यकारी होता है तथा इसके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। लोक अदालतों में कोई न्यायालय शुल्क नहीं लिया जाता और यदि न्यायालय में लंबित किसी मामले को लोक अदालत में भेजा जाता है तथा उसका समाधान हो जाता है, तो मूल रूप से जमा की गई न्यायालय फीस भी संबंधित पक्षों को वापस कर दी जाती है।
इसी संदर्भ में, विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यरत विभिन्न विधिक सेवा संस्थाओं ने 180 पीठों के माध्यम से कुल 89,222 मामलों को विचारार्थ लिया। इनमें से 83,623 मामलों का सौहार्दपूर्ण समाधान कर निपटारा किया गया, जिसमें कुल 42,09,04,185 रुपये की क्षतिपूर्ति अथवा समझौता राशि शामिल रही। लोक अदालत की कार्यवाही जिला न्यायालय परिसरों तथा तहसील न्यायालयों में संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSAs) के अध्यक्षों की देखरेख में आयोजित की गई। इसमें न्यायिक अधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, एलएडीसी, राजस्व अधिकारियों तथा बार के सदस्यों ने भाग लिया।
विभिन्न जिलों में दीवानी विवादों, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) मामलों, वैवाहिक विवादों, ट्रैफिक चालानों, राजस्व मामलों, बिजली बिलों, बीएसएनएल विवादों, श्रम मामलों तथा अन्य समझौतायोग्य अपराधों के शीघ्र निपटारे हेतु विशेष पीठों का गठन किया गया। इन मामलों का निपटारा आपसी सहमति से किया गया, जिससे लंबित मामलों का बोझ कम हुआ और वादकारियों को त्वरित, सस्ती तथा सुलभ न्याय व्यवस्था सुनिश्चित हुई।
जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह व्यवस्था वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को और अधिक मजबूत कर रही है। यह सौहार्दपूर्ण समझौतों को बढ़ावा देने के साथ-साथ नियमित न्यायालयों पर मुकदमों के बोझ को भी कम कर रही है। उल्लेखनीय है कि **परक्राम्य लिखत अधिनियम** के अंतर्गत मामलों, विशेषकर चेक बाउंस मामलों के लिए विशेष लोक अदालतें 18 जुलाई 2026 तथा 21 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी राष्ट्रीय लोक अदालत क्रमशः 12 सितंबर और 12 दिसंबर को आयोजित होने की संभावना है। जो लोग इस बार इस सुविधा का लाभ नहीं उठा सके, वे आगामी सत्रों में इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं।