**अगले संघर्ष के लिए भारत को तैयार करना**

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हाल ही में रक्षा विशेषज्ञों की टिप्पणियों पर आधारित मीडिया रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया है, जिन्हें भारत को प्राथमिकता के आधार पर लेने की आवश्यकता है। पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष में भारतीय सशस्त्र बलों को बढ़त हासिल रही, लेकिन कुछ क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों के प्रति प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही। विशेषज्ञों ने वायु शक्ति के बेहतर समन्वित उपयोग, ड्रोन तकनीक को मजबूत करने और एक मजबूत संचार प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

देश को वायु श्रेष्ठता को और मजबूत करने के साथ-साथ साइबर स्पेस, सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। भारत ने पिछले लगभग चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान पश्चिमी सीमा पर लेह से लेकर सर क्रीक तक कई चरणों में आए दुश्मन के ड्रोन हमलों को एस-400 और आकाश मिसाइल प्रणाली के प्रभावी उपयोग से सफलतापूर्वक विफल किया।

रक्षा विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि भारत को दुश्मन द्वारा चलाए गए दुष्प्रचार अभियान का भी प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा, जिसका उद्देश्य सेना और आम जनता का मनोबल गिराना था। रिपोर्ट में पाकिस्तान को “सक्षम प्रतिद्वंद्वी” बताया जाना भी महत्वपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अब पाकिस्तान को कमजोर नहीं समझ सकता, क्योंकि आज की दुनिया में भले ही पाकिस्तान सामने दिखाई दे, लेकिन उसे अन्य देशों का समर्थन भी मिल सकता है, जो भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए पाकिस्तान को गंभीरता से लेना आवश्यक है और यदि जरूरत पड़े तो सरकार को रक्षा बजट में कई गुना वृद्धि करनी चाहिए। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी युद्धों और संघर्षों से सबक लेना भी जरूरी है। विशेषज्ञों ने कहा है कि पिछले वर्ष पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए गए अधिकांश ड्रोन केवल भारतीय हथियार प्रणालियों को व्यस्त रखने के लिए थे, ताकि बाद में हमलावर ड्रोन अधिक प्रभावी तरीके से हमला कर सकें।

पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध में आधुनिक युद्धों में ड्रोन की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारत को जल्द से जल्द अपनी एंटी-ड्रोन तकनीक को और मजबूत करना होगा। पाकिस्तान को आतंकवाद से रोकने के लिए भारत के पास मजबूत रक्षा व्यवस्था के साथ प्रभावी आक्रामक क्षमता भी होनी चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिक्रिया की गति, गहराई और व्यापकता को और बढ़ाने की आवश्यकता है। ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि भारत बिना किसी देरी के अगले स्तर की सैन्य तैयारी सुनिश्चित करे, क्योंकि यह कहना मुश्किल है कि पाकिस्तान को फिर कब कड़ा जवाब देने की आवश्यकता पड़ जाए।

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