मूडीज नहीं, कई तथ्य हैं मोदी सरकार में भारत की आर्थिक मजबूती के
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
दुनिया इस समय आर्थिक अस्थिरता, युद्धों, ऊर्जा संकट, महंगाई और वैश्विक व्यापारिक तनावों के दौर से गुजर रही है। कोविड महामारी के बाद अनेक विकसित और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाएं अब भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी हैं। ऐसे समय में भारत का लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ना अपने आप में महत्वपूर्ण संकेत है। यही कारण है कि आज भारत को दुनिया की सबसे भरोसेमंद उभरती अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा है।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है कि भारत ने हर बड़े वैश्विक आर्थिक झटके के बीच उल्लेखनीय स्थिरता दिखाई है। कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पैदा हुई महंगाई, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति, बैंकिंग संकट और हालिया वैश्विक शुल्क दबाव जैसे अनेक संकटों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति संतुलित बनी रही।
वस्तुत: भारत की आर्थिक मजबूती को केवल मूडीज की रिपोर्ट तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। इसके पीछे अनेक ऐसे ठोस तथ्य हैं, जो यह बताते हैं कि बीते वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत आधार तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक नीतियों में जो स्थिरता और दीर्घकालिक दृष्टि दिखाई दी, उसी का परिणाम है कि आज भारत वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक बाजारों में शामिल हो चुका है।
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में भारत की मौद्रिक नीति को उसकी सबसे बड़ी ताकत बताया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने महंगाई नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। दुनिया के अनेक देशों में महंगाई दोहरे अंक तक पहुंच गई, मगर भारत ने उसे नियंत्रित दायरे में बनाए रखा। निवेशकों का भरोसा इसी कारण लगातार बढ़ा है।
भारत की दूसरी बड़ी ताकत उसका विशाल विदेशी मुद्रा भंडार है। यह भंडार आर्थिक सुरक्षा कवच है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता आने पर यही भंडार रुपये को स्थिर रखने और आयात जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। अनेक देशों की मुद्राएं वैश्विक दबाव में तेजी से कमजोर हुईं, जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक संतुलित बनी रही। वहीं, भारत की घरेलू मांग भी उसकी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभरी है। देश की विशाल आबादी और बढ़ता मध्यम वर्ग आर्थिक गतिविधियों को गति देता है। यही कारण है कि वैश्विक मंदी के दौर में भी भारत में खपत बनी रही। हाउसिंग, वाहन, डिजिटल सेवाओं और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ती दिखाई दी।
वित्त वर्ष 2025-26 के बैंकिंग आंकड़े इस मजबूती को और स्पष्ट करते हैं। 15.9 प्रतिशत की क्रेडिट ग्रोथ यह संकेत देती है कि उद्योग, व्यापार और उपभोक्ता क्षेत्र में गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। कुल कर्ज 212.9 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचना आर्थिक विस्तार का बड़ा संकेत है। सेवा क्षेत्र में 19 प्रतिशत की क्रेडिट वृद्धि बताती है कि भारत का सर्विस सेक्टर लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल सेवाएं, पर्यटन, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं ने भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।
उद्योग क्षेत्र में भी कर्ज वितरण लगभग दोगुना होकर 15 प्रतिशत तक पहुंचा है, जो विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार का संकेत देता है। विशेष रूप से माइक्रो और स्मॉल इंडस्ट्रीज में 33.1 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि आर्थिक विकास अब केवल बड़े शहरों या कॉरपोरेट समूहों तक सीमित नहीं रहा। छोटे उद्योगों और स्थानीय उद्यमों को भी वित्तीय मजबूती मिल रही है। यही वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ता कदम है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के संकेत भी उत्साहजनक हैं। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में 15.7 प्रतिशत की क्रेडिट ग्रोथ बताती है कि गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। कृषि क्षेत्र में तकनीक, सिंचाई, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण आधारभूत संरचना पर ध्यान देने का सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। टैक्स संग्रह के आंकड़े भी आर्थिक मजबूती का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। प्रत्यक्ष कर संग्रह में 5.12 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि आर्थिक गतिविधियां स्थिर हैं और कर अनुपालन बेहतर हुआ है। कॉरपोरेट टैक्स में बढ़ोतरी कंपनियों की बेहतर आय और कारोबार विस्तार की ओर संकेत करती है।
इसके साथ आज जो दिख रहा है, वह यह भी है कि देश में डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित प्रशासन ने कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। व्यक्तिगत ऋणों में 16.2 प्रतिशत की वृद्धि यह दिखाती है कि आम नागरिकों का आर्थिक विश्वास मजबूत हुआ है। लोग घर खरीद रहे हैं, वाहन ले रहे हैं और निवेश करने का साहस दिखा रहे हैं। यह किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
वास्तव में भारत की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार नीतिगत स्थिरता है। पिछले वर्षों में आधारभूत संरचना निर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण प्रोत्साहन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, जीएसटी, बैंकिंग सुधार और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं ने अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। वस्तुत: आज भारत को लेकर इसलिए ही दुनिया की अनेक शक्तिशाली संस्थाएं- अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, एसएंडपी और फिच भी भारत की दीर्घकालिक संभावनाओं को सकारात्मक मान रही हैं।
स्पष्ट है कि भारत की आर्थिक मजबूती किसी एक रिपोर्ट या एजेंसी के मूल्यांकन का परिणाम नहीं है। इसके पीछे मजबूत नीतियां, विशाल घरेलू बाजार, बढ़ता निवेश, बैंकिंग स्थिरता, डिजिटल क्रांति, विदेशी मुद्रा भंडार और जनविश्वास जैसे अनेक ठोस आधार मौजूद हैं। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के इस दौर में भी भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और विश्व की सबसे भरोसेमंद अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह लगातार मजबूत कर रहा है।