साहिब बंदगी के सद्गुरु मधुपरमहंस जी महाराज ने प्रवचनों में किया आत्मा और धर्म का रहस्य उजागर
3 अगस्त — साहिब बंदगी के सद्गुरु श्री मधुपरमहंस जी महाराज ने आज अपने दिव्य प्रवचनों के माध्यम से संगत को आत्मा और धर्म के गूढ़ रहस्यों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों में आत्मा को लेकर कोई मतभेद नहीं है। सभी धर्म आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। भारत को उन्होंने “विश्वगुरु” बताया और कहा कि ऋग्वेद, जो संसार का सबसे प्राचीन ग्रंथ है, सबसे पहले परमात्मा को निराकार बताता है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा के निराकार स्वरूप को सभी धर्मों ने स्वीकार किया है — जैसे इस्लाम में ‘बेजो़र खुदा’ कहा गया है। ऋग्वेद के आगे संतों ने साहिब के निराकार स्वरूप का वर्णन किया, लेकिन संतों को हाशिये पर डालने के प्रयास भी होते रहे। उन्होंने बताया कि कबीर साहिब न तो माता के गर्भ से आए, न ही शरीर छोड़ा। वे अमर लोक से आए थे।
महाराज जी ने ऐतिहासिक संदर्भों के माध्यम से बताया कि महापुरुषों के साथ समाज ने हमेशा गलत धारणाएँ बनाई हैं। उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे उनके बारे में फौज में अफवाह फैली कि वे कारगिल युद्ध में शहीद हो गए हैं या उन्होंने कहीं शादी कर ली है। जबकि वे फौज में सेवा कर रहे थे और उनकी तनख्वाह उनके पिता को भेजी जा रही थी।
उन्होंने कहा, “दुनिया की सोच और बातें कभी रुकती नहीं, लेकिन सत्य वही है जो आत्मा से जुड़ा है। संतों का कार्य केवल आत्मा को परमात्मा से जोड़ना है।”