सतर्क रहें

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निस्संदेह प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा सुरक्षा बलों को दी गई प्रेरणा के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सीमाओं पर या भीतरी क्षेत्रों में तैनात सैनिक चौबीसों घंटे पूरी सतर्कता के साथ डटे हुए हैं और आतंकवादियों या देश के किसी भी दुश्मन को भारत की ओर बुरी नजर डालने का कोई अवसर नहीं दे रहे हैं। सुरक्षा बलों को खुली छूट देने का परिणाम काफी उत्साहजनक रहा है, क्योंकि पाकिस्तान जैसे दुष्ट देश द्वारा प्रायोजित घुसपैठ अब लगभग असंभव हो गई है।

इसी संदर्भ में सेना ने पुंछ के कृष्णा घाटी सेक्टर में एक घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए एक आतंकवादी को मार गिराया, जब सुरक्षा बलों ने संदिग्ध गतिविधि देखी। यह उल्लेखनीय है कि भारत इस तथ्य से पूरी तरह अवगत है कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास कई आतंकवादी समूह लॉन्च पैड पर मौजूद हैं और भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर शांति भंग करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह स्थिति सीमाओं पर तैनात भारतीय सुरक्षा बलों के लिए लगातार सतर्क रहने और पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में भेजने के हर प्रयास को विफल करने की आवश्यकता को और बढ़ा देती है।

यह भी उल्लेखनीय है कि पहले भी कई मामलों में पाकिस्तान ने इसी प्रकार की रणनीति अपनाकर अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के रास्ते आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में भेजकर शांति भंग करने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की है। यह अच्छी बात है कि इस बार खुफिया एजेंसियों ने पहले ही सेना सहित सभी सुरक्षा बलों को सीमा पर निगरानी बढ़ाने के लिए सतर्क कर दिया था और यह सफल अभियान भी सुरक्षा बलों की मुस्तैदी का परिणाम है।

समय की मांग है कि पाकिस्तान की नापाक साजिशों को विफल करने के लिए एक प्रभावी आतंकवाद-रोधी तंत्र, मजबूत खुफिया ढांचा और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। कल की सफलता इसलिए भी संभव हो सकी क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मद्देनजर राजौरी और पुंछ के सीमावर्ती जिलों में पहले से ही हाई अलर्ट घोषित किया गया था।

पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में भेजने के प्रयासों को हमेशा के लिए रोकने हेतु एक सशक्त प्रतिरोधी व्यवस्था विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए सुरक्षा बलों की विभिन्न शाखाओं और खुफिया एजेंसियों के बीच पूर्ण समन्वय और सतर्कता समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इस संदर्भ में सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि वे देश की पहली सुरक्षा पंक्ति हैं। उन्हें सरकार की आंख और कान बनकर संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी समय पर देनी चाहिए। यह कहा जा सकता है कि मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, समय पर खुफिया जानकारी और जनता का सहयोग ही उन ताकतों की साजिशों को नाकाम कर सकता है जो आतंकवाद के माध्यम से भारत को अस्थिर करना चाहती हैं।

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