शहरी चुनौती कोष, ऑटो डीसीआर और झील संरक्षण उपायों के क्रियान्वयन की सीएस ने की समीक्षा*
जम्मू, 19 दिसंबर:** मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने आज आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी पहलों की प्रगति और क्रियान्वयन की समीक्षा की। इनमें शहरी चुनौती कोष (Urban Challenge Fund), भवन अनुमति के लिए ऑटो डेवलपमेंट कंट्रोल रेगुलेशन (Auto DCR) प्रणाली तथा डल और निगीन झीलों के संरक्षण एवं विकास कार्य शामिल थे।
समीक्षा बैठक में आवास एवं शहरी विकास विभाग (H&UDD) की आयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग (RDD) के सचिव, जम्मू विकास प्राधिकरण (JDA) के उपाध्यक्ष, जम्मू नगर निगम (JMC) के आयुक्त, झील संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (LCMA) के उपाध्यक्ष सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने शहरी चुनौती कोष का अधिकतम लाभ उठाने पर जोर दिया और संबंधित विभागों को भारत सरकार द्वारा इस योजना के तहत चिन्हित एक लाख करोड़ रुपये में से कम से कम 1 प्रतिशत राशि को लक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि चयनित परियोजनाओं को सुचारु, समयबद्ध और निर्बाध क्रियान्वयन के लिए SASCI से अतिरिक्त वित्तीय सहायता के साथ पूरक बनाया जाए।
इस पहल के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्य सचिव ने ऐसे परियोजनाओं के सावधानीपूर्वक चयन की आवश्यकता पर बल दिया, जो जनसंख्या वृद्धि और बदलती नागरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शहरी केंद्रों को सतत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाने में सार्थक योगदान दें।
निर्माण अनुमतियों के लिए ऑटो डीसीआर प्रणाली के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने H&UDD को निर्देश दिया कि इस प्लेटफॉर्म को रेरा (RERA) पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाए, ताकि अधिनियम के तहत वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग को भी आवश्यक भवन उपविधियों के अंतिम रूप दिए जाने के बाद, एनआईसी के तकनीकी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इसी तरह की ऑनलाइन भवन अनुमति प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।
आयुक्त सचिव, H&UDD, मंदीप कौर ने जम्मू-कश्मीर के लिए शहरी चुनौती कोष के महत्व को रेखांकित किया और बैठक को इस योजना के तहत चिन्हित परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इनमें पार्किंग अवसंरचना का विस्तार, आवासीय आवास परियोजनाएं, स्वच्छता पहल, अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली और अन्य शहरी उपयोगिता सेवाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शहरों में जीवन गुणवत्ता में सुधार करना है।
जम्मू नगर निगम के आयुक्त देवांश यादव ने बताया कि ऑटो डीसीआर प्रणाली भवन योजनाओं के सीएडी (CAD) ड्रॉइंग की स्वतः जांच करती है, जिससे बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के नगरपालिका और प्रांतीय उपविधियों का अनुपालन सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली प्रसंस्करण समय को काफी कम करती है और भवन अनुमति प्रदान करने में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाती है।
उन्होंने आगे बताया कि यह प्लेटफॉर्म ऑनलाइन आवेदन और प्रस्तावों की ट्रैकिंग, स्पष्ट पदानुक्रम और भूमिकाओं का निर्धारण, अलर्ट और एमआईएस रिपोर्ट तैयार करने, भुगतान गेटवे और डिजिटल हस्ताक्षर सुविधा से युक्त उपयोगकर्ता-अनुकूल डैशबोर्ड प्रदान करता है। यह प्रणाली आंतरिक और बाहरी विभागों से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाती है।
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव आइजाज़ असद ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भवन उपविधियों का मसौदा अंतिम चरण में है और विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में भवन अनुमति प्रदान करने के लिए एक समान सिंगल-विंडो ऑनलाइन प्रणाली शुरू करने की योजना बना रहा है, ताकि प्रक्रिया प्रभावी और समयबद्ध हो।
एलसीएमए के उपाध्यक्ष मंज़ूर अहमद कादरी ने डल और निगीन झीलों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। उन्होंने चल रहे कार्यों और झील पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए प्रस्तावित आगामी परियोजनाओं की स्थिति से मुख्य सचिव को अवगत कराया।