लगातार बारिश के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राहत और बहाली कार्यों की समीक्षा तेज की**
*आवश्यक सेवाओं की समयबद्ध बहाली, प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत और स्थिति पर लगातार निगरानी के दिए निर्देश**
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**श्रीनगर, 22 जुलाई:** लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के मद्देनज़र मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को यहां सिविल सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में जम्मू-कश्मीर में राहत एवं बचाव कार्यों, आवश्यक सेवाओं की बहाली तथा समग्र बाढ़ तैयारियों की समीक्षा की गई।
बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्री सकीना इत्तू, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, प्रशासनिक सचिव, संभागीय आयुक्त कश्मीर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा, युवा सेवा एवं खेल, परिवहन, सूचना प्रौद्योगिकी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा एआरआई एवं प्रशिक्षण मंत्री सतीश शर्मा, संभागीय आयुक्त जम्मू तथा सभी उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियमित मौसम के कारण उत्पन्न बाढ़ जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए उच्च स्तर की तैयारियां बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रही बाढ़ जैसी स्थितियां दीर्घकालिक बाढ़ शमन उपायों और मजबूत आधारभूत ढांचे की मांग करती हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने, विशेष रूप से पेयजल और बिजली जैसी आवश्यक सेवाओं को 24 घंटे के भीतर बहाल करने, संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता देने तथा लापता लोगों की तलाश और बरामदगी के प्रयास तेज करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने जम्मू और कश्मीर के संभागीय आयुक्तों को तत्काल बाढ़ की स्थिति का आकलन कर सबसे अधिक प्रभावित जिलों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2025-26 की तर्ज पर इन जिलों के उपायुक्तों को पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाए ताकि राहत, पुनर्वास और क्षतिग्रस्त आधारभूत ढांचे की बहाली का कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने पूंछ और राजौरी जिलों में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में बताया गया कि फ्लैश फ्लड के तुरंत बाद सिविल प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), सेना, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) तथा अन्य विभागों द्वारा संयुक्त राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया, जो अभी भी जारी है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को पूंछ और राजौरी में बिजली आपूर्ति की बहाली में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल योजनाओं की बहाली बिजली आपूर्ति पर निर्भर है, इसलिए बिजली विकास विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर बहाली कार्य पूरा करे और शेष समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करे, ताकि पेयजल सहित सभी आवश्यक सेवाएं जल्द से जल्द सामान्य हो सकें।
मुख्यमंत्री ने जिला-वार राहत वितरण और नुकसान के आकलन की भी समीक्षा की तथा उपायुक्तों को निर्देश दिए कि निर्धारित मानकों के अनुसार सभी प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने मकानों, पशुधन, सार्वजनिक आधारभूत ढांचे और कृषि भूमि को हुए नुकसान का भी जायजा लिया तथा संबंधित विभागों को आकलन, बहाली और मुआवजा प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान जम्मू और कश्मीर के संभागीय आयुक्तों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बाढ़ की तैयारियों और राहत उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
मुख्यमंत्री को बताया गया कि कश्मीर संभाग में व्यापक बाढ़ तैयारी तंत्र स्थापित किया गया है। सभी उपायुक्त, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। बचाव दल, निकासी केंद्र, आपातकालीन उपकरण और आवश्यक सेवाएं किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रखी गई हैं।
बैठक में जानकारी दी गई कि घाटी में 654 संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है, जहां लगभग 7.22 लाख लोगों पर जोखिम बना हुआ है। एहतियात के तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों से 1,505 लोगों को पहले ही सुरक्षित राहत केंद्रों में पहुंचाया जा चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों के लिए भी निकासी योजनाएं तैयार हैं।
अधिकारियों ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्यों को मजबूत बनाने के लिए 744 राहत केंद्र, एसडीआरएफ की 108 नौकाएं, सेना की 25 नौकाएं, 98 सैटेलाइट फोन, 102 चिन्हित हेलिपैड तथा पर्याप्त आपातकालीन राहत निधि उपलब्ध रखी गई है।
बैठक में यह भी बताया गया कि जिला आपातकालीन संचालन केंद्र तथा राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र चौबीसों घंटे सक्रिय हैं और स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि झेलम नदी का जलस्तर सभी निगरानी केंद्रों पर चेतावनी स्तर से काफी नीचे है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें घाटी में नदियों और बाढ़ चैनलों की लगातार निगरानी कर रही हैं। स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल आपूर्ति और दूरसंचार सहित सभी आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं तथा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी तैयार रखी गई हैं।
जम्मू संभाग की तैयारियों की जानकारी देते हुए संभागीय आयुक्त जम्मू ने बताया कि प्रतिकूल मौसम और फ्लैश फ्लड से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सभी जिलों में 24×7 आपातकालीन संचालन केंद्र सक्रिय हैं, आपदा एवं बाढ़ प्रतिक्रिया योजनाएं लागू हैं तथा मौसम संबंधी परामर्श नियमित रूप से जारी किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जम्मू संभाग में 363 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है, 142 मॉक ड्रिल आयोजित की जा चुकी हैं तथा आपातकालीन संचालन के लिए 138 हेलिपैड चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा एसडीआरएफ निधि, प्रशिक्षित स्वयंसेवकों और आवश्यक आपदा प्रतिक्रिया उपकरणों की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
बैठक में बताया गया कि संवेदनशील स्थानों पर बहाली कार्यों के लिए आवश्यक मशीनरी पहले से तैनात कर दी गई है तथा जिला प्रशासन और सभी संबंधित विभाग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार हैं।