**युवा हमारे भविष्य के निर्माता हैं, बड़े सपने देखें और उत्कृष्टता के लिए निरंतर प्रयास करें : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा**

**उपराज्यपाल ने लाल डेड साहित्य पुरस्कार समारोह में की शिरकत, डॉ. वैदेही तमन की पुस्तक ‘लाल डेड: द मदर ऑफ कश्मीर’ का किया लोकार्पण**

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**श्रीनगर, 12 जुलाई:** उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज लाल डेड साहित्य पुरस्कार समारोह तथा डॉ. वैदेही तमन की नई पुस्तक **‘लाल डेड: द मदर ऑफ कश्मीर’** के लोकार्पण समारोह में भाग लिया। उन्होंने सम्मानित साहित्यकारों से लाल डेड, कबीर, नुंद ऋषि, गुरु नानक और तुलसीदास की कालजयी शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने कहा कि भारत के पूर्वजों ने विज्ञान और गहरे आध्यात्मिक मूल्यों के संतुलन के साथ राष्ट्र का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति के लिए वैज्ञानिक सोच और आध्यात्मिक दृष्टि दोनों आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी समृद्ध आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहचान है, जो सदियों से एक जलती मशाल की तरह पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। उन्होंने युवाओं से इस विरासत की ज्योति को कभी मंद न पड़ने देने की अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इस समृद्ध धरोहर से नई पीढ़ी को प्रेरित किया जाए और जम्मू-कश्मीर को आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवाओं को स्पष्ट उद्देश्य दिया जाए।

उपराज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र निर्माण प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। युवा देश के भविष्य के निर्माता हैं। उन्होंने युवाओं से साधारण उपलब्धियों से संतुष्ट न रहने, बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति धैर्य, परिश्रम और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि भारत बाहरी विकास के साथ-साथ आंतरिक आध्यात्मिक उन्नति को भी समान महत्व देता है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्रा यह दर्शाती है कि हमारी मूल सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं आज भी जीवंत हैं और यही साझा विरासत पूरे देश को एक सूत्र में बांधती है।

उपराज्यपाल ने लेखकों, विचारकों और कलाकारों से इस आध्यात्मिक परंपरा को संरक्षित करने और समाज तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अतीत में लौटने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अपनी विरासत की सत्यता, श्रेष्ठता और सौंदर्य का सम्मान करते हुए आधुनिक दुनिया के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत जड़ों वाला वृक्ष ही तेज हवाओं में भी मजबूती से खड़ा रहता है और निरंतर विकास करता है।

उन्होंने समाज से दो महत्वपूर्ण आग्रह किए। पहला, जीवन की व्यस्तताओं में छूट चुकी अपनी किसी सांस्कृतिक धरोहर—चाहे वह भाषा हो, गीत, व्यंजन, कहानी या परंपरा—को फिर से अपनाएं और नई पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करें। दूसरा, अपनी सांस्कृतिक पहचान को सदियों से चली आ रही अमूल्य विरासत मानते हुए उसकी ज्योति को जीवित रखें और उससे लाखों नए विचारों को प्रेरणा दें।

उपराज्यपाल ने सम्मानित साहित्यकारों, शिक्षकों और कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने उत्कृष्ट कार्यों से राष्ट्र को समृद्ध बनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज के मार्गदर्शक होते हैं और उनकी वास्तविक उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव से मापी जाती है। लेखन, शिक्षा, कला और लोकसेवा के माध्यम से वे देश के साझा भविष्य का निर्माण करते हैं।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में लेखकों और शिक्षकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। साहित्य समाज में संवेदनशीलता पैदा करता है और शिक्षा ज्ञान प्रदान करती है। दोनों मिलकर ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करते हैं जो देश को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

उपराज्यपाल ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी परंपरा और आधुनिकता के संगम पर खड़ी है। उनके हाथों में तकनीक है, लेकिन उनके मन नए उद्देश्य और नई दिशा की तलाश में हैं। उन्होंने कहा कि लेखकों का दायित्व है कि वे युवाओं को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ें और उन्हें सीमाओं से परे सोचने के लिए प्रेरित करें, जबकि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कौशल देना नहीं बल्कि उनमें मूल्य, आत्मविश्वास और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का साहस भी विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यदि साहित्य और शिक्षा साथ-साथ चलें तो देश की प्रगति केवल भौतिक नहीं बल्कि नैतिक और आध्यात्मिक भी होगी।

इस अवसर पर उपराज्यपाल ने बुद्धिजीवियों, लेखकों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और सृजनकर्ताओं से पांच महत्वपूर्ण आग्रह किए। उन्होंने युवाओं को स्वतंत्र चिंतन और सत्य की खोज के लिए प्रेरित करने, देश की समृद्ध संस्कृति का दस्तावेजीकरण और प्रसार करने, पुस्तकों के विचारों को व्यवहारिक जीवन में उतारने, अपने अनुभवों से नई पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करने तथा जलवायु परिवर्तन जैसी जटिल चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को साथ लाने का आह्वान किया।

उन्होंने दोहराया कि राष्ट्र निर्माण एक साझा दायित्व है। मजबूत अर्थव्यवस्था आधारभूत ढांचा तैयार कर सकती है, लेकिन उसकी सुरक्षा केवल जिम्मेदार नागरिक ही कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से फिर आग्रह किया कि वे बड़े सपने देखें, कड़ी मेहनत करें और उत्कृष्टता प्राप्त करने का संकल्प लें।

लाल डेड जैसी महान विभूतियों को समर्पित संग्रहालय स्थापित करने की मांग पर उपराज्यपाल ने आश्वासन दिया कि इस दिशा में उचित कदम उठाए जाएंगे।

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