भविष्य के युद्ध केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता से नहीं, बल्कि सैनिकों के साहस और राष्ट्रीय संकल्प से जीते जाएंगे : राजनाथ सिंह**

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**विशाखापट्टनम, 11 जुलाई:** रक्षा मंत्री **राजनाथ सिंह** ने शनिवार को कहा कि भविष्य के युद्ध भले ही **कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई)** की मदद से लड़े जाएं, लेकिन उनकी जीत आज भी राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिकों और मजबूत सैन्य शक्ति पर ही निर्भर करेगी।

विशाखापट्टनम में **आईएनएस महेंद्रगिरि** के नौसेना में शामिल किए जाने के समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि **आंध्र प्रदेश** भारत के रक्षा और एयरोस्पेस विनिर्माण का नया केंद्र बनकर उभरा है।

रक्षा आधुनिकीकरण के प्रति सरकार के संतुलित दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत जहां एक ओर नई पीढ़ी की आधुनिक तकनीकों में निवेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने **ऑपरेशन सिंदूर** का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक सैन्य शक्ति और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

उन्होंने कहा, **”भविष्य के युद्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से लड़े जा सकते हैं, लेकिन उन्हें जीतने के लिए राष्ट्रीय संकल्प, प्रशिक्षित सैनिक और सक्षम सैन्य शक्ति की आवश्यकता हमेशा रहेगी। नई तकनीकें और पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। पारंपरिक सैन्य प्लेटफॉर्म के बिना नई तकनीकें अपने आप में अधूरी हैं।”**

राजनाथ सिंह ने कहा कि यह सत्य है कि नई तकनीकों ने युद्ध की प्रकृति को बदल दिया है, लेकिन इससे पारंपरिक युद्ध प्रणाली की भूमिका कम नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि युद्ध के मूल सिद्धांतों को पूरा करने के लिए मजबूत पारंपरिक सैन्य क्षमता आज भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी पहले थी।

समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा के बीच गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्र आज भी व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में **”सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास)”** की परिकल्पना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत को एक **विश्वसनीय क्षेत्रीय साझेदार** और **शुद्ध सुरक्षा प्रदाता (नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर)** बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों तथा संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय और विदेशी नागरिकों की सुरक्षित निकासी के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता का लगातार परिचय दिया है। इसी कारण भारतीय नौसेना को **प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली सेना (फर्स्ट रिस्पॉन्डर)** और **विश्वसनीय सुरक्षा भागीदार** के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

हाल ही में पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के दौरान भारतीय नौसेना की भूमिका का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि **ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा** के तहत नौसेना ने **9,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के आवश्यक सामान** ले जा रहे **18 व्यापारिक जहाजों** को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया। उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय नौसेना केवल राष्ट्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश के आर्थिक हितों की भी प्रभावी ढंग से रक्षा कर रही है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि **आईएनएस महेंद्रगिरि** का सफलतापूर्वक नौसेना में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि भारत अब स्वदेशी विशेषज्ञता के बल पर अत्याधुनिक युद्धपोतों की डिजाइन, निर्माण और तैनाती करने में सक्षम हो चुका है।

उन्होंने बताया कि यह युद्धपोत स्वदेशी **रॉकेट लांचर**, **टॉरपीडो लांचर**, **एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली**, **इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली** तथा **क्लोज-इन वेपन सिस्टम** से सुसज्जित है, जिससे यह कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से युद्ध संचालन करने में सक्षम एक अत्यंत शक्तिशाली युद्धपोत बन गया है।

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