मुख्य सचिव ने नए जीएमसी में टेली-आईसीयू स्थापित करने पर नीति आयोग से मार्गदर्शन मांगा

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श्रीनगर 18 सितंबर। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. पाल के साथ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के नवस्थापित शासकीय मेडिकल कॉलेजों में टेली-आईसीयू सुविधाओं की स्थापना को लेकर विस्तृत चर्चा की।
इस दौरान डॉ. पाल ने उपयोगी अनुभव साझा करते हुए देशभर में अपोलो टेली हेल्थ, मेदांता, क्लाउडफिजिशियन और हेल्थ नेट जैसे अग्रणी स्वास्थ्य-तकनीकी प्रदाताओं द्वारा लागू सफल टेली-आईसीयू मॉडल्स पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुझाव दिया कि इन मॉडलों का अध्ययन करना आवश्यक है ताकि जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों के लिए उपयुक्त रणनीतियाँ तय की जा सकें।
डॉ. पाल ने आगे सलाह दी कि टेली-आईसीयू पहल को शुरू करने से पहले प्रत्येक अस्पताल की आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और वर्तमान अवसंरचना का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने इस तकनीक-आधारित स्वास्थ्य सेवा मॉडल की सफलता के लिए क्षमता निर्माण और कर्मचारियों के प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने डॉ. पाल के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नवोन्मेषी स्वास्थ्य समाधान अपनाने के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर हब-एंड-स्पोक मॉडल के तहत टेली-आईसीयू सुविधाएँ स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे 24 घंटे क्रिटिकल केयर निगरानी और विशेषज्ञ परामर्श संभव हो सकेगा। इस मॉडल के तहत नए जीएमसी स्पोक्स के रूप में कार्य करेंगे जिन्हें केंद्रशासित प्रदेश के भीतर एक मजबूत हब एवं कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा। मुख्य सचिव ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जम्मू-कश्मीर से एक विशेषज्ञ टीम देश के अग्रणी स्वास्थ्य संस्थानों में भेजी जाए, ताकि वे टेली-आईसीयू और उनके कमांड सेंटर्स की कार्यप्रणाली का अध्ययन कर सकें। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मानव संसाधन की कमी जैसी विशिष्ट चुनौतियों के बावजूद प्रशासन क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अत्याधुनिक हब स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसे प्रौद्योगिकी साझेदारों से विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त हो। यह हब न केवल स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान करेगा बल्कि केंद्र शासित प्रदेश के अन्य हिस्सों में अतिरिक्त हब स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा, जिससे व्यापक कवरेज और निर्बाध टेली-आईसीयू सेवाएँ सुनिश्चित हो सकें।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. सैयद आबिद राशिद शाह ने बताया कि विभाग ने प्रत्येक नए जीएमसी में कम से कम 10-बिस्तरों वाले टेली-आईसीयू स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने इस दिशा में पहले से किए गए कार्य और आगे की योजना का अवलोकन भी प्रस्तुत किया।
स्किमस के निदेशक प्रो. मोहम्मद अशरफ गनई ने संस्थान की वर्तमान सुविधाओं और गहन चिकित्सा के अनुभव के आधार पर विशेषज्ञ सुझाव दिए। विभिन्न जीएमसी के प्राचार्यों ने भी टेली-आईसीयू की उपयोगिता, अनुप्रयोग व प्रभावी कार्यान्वयन की रणनीतियों पर अपने विचार रखे।
यह विचार-विमर्श जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य प्रणाली में उन्नत टेलीमेडिसिन तकनीकों के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसका उद्देश्य विशेष रूप से केंद्रशासित प्रदेश के उपेक्षित क्षेत्रों में गहन चिकित्सा सेवाओं को सु.ढ़ बनाना है।

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