भारत का खेल उदय: CWG 2030 से ओलंपिक महत्वाकांक्षा तक, वैश्विक प्रतिष्ठा के नए युग की ओर

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लेखक: डॉ. मनसुख मांडविया

 

कॉमनवेल्थ स्पोर्ट ने 26 नवम्‍बर, 2025 कोऔपचारिक तौर पर भारत को राष्ट्र्मंडल खेलों के शताब्दी वर्षके लिए2030 राष्ट्र्मंडल खेलों का मेज़बान घोषित किया, जो देश की खेल यात्रा में एक अहम पल है। यह सिर्फ़ एक बड़ी मेज़बानी का अधिकार नहीं है, यह दुनिया भर में एक पहचान है कि भारत बड़े अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा मेज़बानों में से एक बन गया है, और एक ऐसा देश है जो ओलंपिक खेलों की मेज़बानी करने के अपने लंबे स्वप्न की ओर पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

 

अंतर्राष्ट्रीय खेल समुदाय के लिए, यह घोषणा एक ऐसे यथार्थ की पुष्टि करती है जो पिछले एक दशक से लगातार आकार ले रहा है। भारत को अब बड़े पैमाने पर एक भरोसेमंद, ज़्यादा क्षमता वाला और एथलीट-केंद्रित मेज़बान माना जाता है, जो बड़े पैमाने, कुशलता और गर्मजोशी के साथ वैश्विक मानकों के अनुरूप आयोजन करता है। इस पहचान को दुनिया भर के खेल अग्रणियों ने लगातार माना है। अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष ने वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के अपने दौरे के दौरान, पैरा-स्पोर्ट में भारत की आयोजनात्मक उत्कृष्टता और तीव्र प्रगति की तारीफ़ की। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई जाने-माने खिलाड़ियों ने भी भारत की सुविधाओं, चिकित्सा सहायता, प्रतियोगिता प्रबंधन और सम्पूर्ण एथलीट अनुभव की तारीफ़ की।

 

इसी तरह, विश्व बॉक्सिंग अध्यक्ष ने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फ़ाइनल में शामिल होने के लिए हाल ही में भारत के अपने दौरे के दौरान, देश को विश्व बॉक्सिंग का एक स्तम्भ बताया, और भारत कीव्यवसायिकता और मेज़बानी की क्षमता की तारीफ़ की। ये अंतर्राष्ट्रीय समर्थन एक बहुत बड़ी भावना को पुष्ट करते हैं। भारत एक ऐसे स्तर पर पहुँच गया है जहाँ वैश्विक खेल समुदाय उसे सबसे ज़्यादा महत्व वाले आयोजनों के लिए सक्षम देश मानती है।

यह विश्वासपिछले एक दशक में मोदी सरकार के अधीन खेल क्षेत्र और अर्थव्यवस्था दोनों में लगातार बदलाव का नतीजा है। भारत की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता,बढ़ती वैश्विक आर्थिक रैंकिंग और मज़बूत राजकोषीय स्तिथि ने देश के इतिहास में खेलों में इतने बड़े पैमाने पर निवेश को मुमकिन बनाया है। 2013–14 में युवा कार्य और खेल मंत्रालय का कुल आवंटन ₹1,093 करोड़ था। 2025–26 में यह बढ़कर ₹3,794 करोड़ हो गया है, जो मात्र एक दशक में लगभग 250 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

इस निवेश में आई भारी वृद्धि ने देशभर में एक व्यापकखेल पुनर्जागरण को गति दी है।खेलो इंडिया औरअस्मिता महिला लीग जैसी पहलों के माध्यम से जमीनी स्तर पर खेल विकास राज्यों में व्यापक रूप से फैल चुका है, जिनके साथ 1,050+ से अधिक खेलो इंडिया केंद्रों की स्थापना की गई है जो ज़िला स्तर पर कोचिंग, खेल-सुविधाएँ और संसाधन उपलब्ध कराते हैं।

साथ ही, भारत नेटार्गेट अलिम्पिक पोडीयम स्कीम (TOPS) और एक नई स्कीमटार्गेट एशियन गेम्ज़ ग्रूप (TAGG) के माध्यम से एक मजबूत उच्च-प्रदर्शन मार्ग विकसित किया है, जो एथलीटों को शीर्ष स्तरीय प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण और वैश्विक एक्सपोज़र प्रदान करता है।

देश में खेल अवसंरचना अभूतपूर्व गति से बढ़ी है। 350 से अधिक प्रमुख खेल परिसरोंका निर्माण देशभर में पूरा किया जा चुका है या प्रगति पर है, जिससे एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है जो विश्व-स्तरीय प्रतियोगिताओं को समर्थन देने में सक्षम है। यह अवसंरचना निर्माण केवल आयोजन-विशिष्ट नहीं है, बल्किदीर्घकालिक एथलीट विकासके लिए टिकाऊ, बहुउद्देशीय और भविष्य की खेल आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।

भारत की मेज़बानी की क्षमता भी इसके रिकॉर्ड से स्पष्ट होती है। पिछले दशक में भारत ने 20+ शहरोंमें 22 अंतरराष्ट्रीय खलों का सफलतापूर्वक आयोजन किया है—जिसमेंहॉकी विश्व कप, चेस ओलिंपियाड, FIFA U-17 विश्व कप, वर्ल्ड पैरा ऐथ्लेटिक्स चैम्पीयन्शिप्स, तथा ICC पुरुषव महिला क्रिकेट विश्व कप शामिल हैं। हर आयोजन ने भारत की उस प्रतिष्ठा को मजबूती दी है कि वहउत्कृष्टता, व्यापक पैमाने, सुरक्षा, व्यवसायिकता और सांस्कृतिक गर्मजोशीके साथ विश्व-स्तरीय आयोजन करता है।

2029 मेंविश्व पुलिस और फ़ायर खेलों की मेजबानी भारत की बहु-खेल आयोजन क्षमता को और सुदृढ़ करेगी, जो CWG 2030 से पहले एक महत्वपूर्ण तैयारी होगी।

इस व्यापक परिवर्तन के केंद्र में हैंप्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, जिन्होंने खेल को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में स्थापित किया है और उसेविकसित भारत 2047 के बड़े विज़न से जोड़ा है।खेलो भारत नीति औरराष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 जैसे नीतिगत सुधारों ने खेल प्रशासन को आधुनिक बनाया है, पारदर्शिता बढ़ाई है औरएथलीट-प्रथम शासन मॉडल को लागू किया है, जो वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है। इन सुधारों ने भारत की विश्व खेल संगठनों के समक्ष विश्वसनीयता बढ़ाई है और उसे वैश्विक खेल प्रणाली में एक सक्रिय, उत्तरदायी और मजबूत साझेदार के रूप में स्थापित किया है।

2030 राष्ट्र्मंडल खेलोंकी मेजबानी का भारत को मिलना कोई एकल घटना या एक सुधार का परिणाम नहीं है।यह अवसंरचना, एथलीट विकास, जमीनी भागीदारी, खेल प्रशासन सुधार और खेल वित्तीय पारिस्थितिकी के सुदृढ़ीकरण में वर्षों से किए जा रहे सतत निवेश का परिणाम है। यह मोदी सरकार की दशकभर की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसने देश में ऐसे खेल तंत्र, संस्थान और क्षमताएँ विकसित कीं जो आज भारत कोविश्व की सर्वाधिक संभावनाशील और अनुकूल खेल राष्ट्रोंमें सम्मिलित करती हैं।

भारत अब पहचान बनाने की तैयारी नहीं कर रहा, भारत की पहचान बन चुकी है।पिछले दशक में देश सीमित अवसंरचना और छिटपुट प्रदर्शन से बढ़कर अब वैश्विक मान्यता प्राप्त कर चुका है, विश्व-स्तरीय सुविधाएँ, सतत अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन और एक संरचित खेल पारिस्थितिकी जो देश के हर क्षेत्र को जोड़ती है।
राष्ट्र्मंडल खेल 2030 की घोषणा वह क्षण है जब दुनिया ने आधिकारिक रूप से इस परिवर्तन को स्वीकार किया है।

भारत आजआर्थिक रूप से, संस्थागत रूप से और खेल कौशल के स्तर परविश्व मंच पर एक प्रमुख खेल राष्ट्र के रूप में स्थान बनाने के लिए तैयार है।

समाप्त।

(लेखक केंद्रीय युवा कार्य व खेल और श्रम व रोज़गार मंत्रीहैं।)

 

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