सुरक्षित तरीके से शिक्षा फिर शुरू की जाए
जम्मू संभाग के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी या निजी शिक्षण संस्थानों, जिनमें कोचिंग संस्थान और केंद्र भी शामिल हैं, को भौतिक कक्षाएं दोबारा शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकरण के माध्यम से भवनों की सुरक्षा का आकलन करवाने का स्कूल शिक्षा निदेशालय (डीएसई), जम्मू की ओर से जारी आदेश विद्यार्थियों की सुरक्षा की दिशा में एक आवश्यक कदम है।
जम्मू संभाग के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है और रिपोर्टों के अनुसार कई स्कूलों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों को संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। ऐसे में किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए यह आदेश बिल्कुल उचित कदम प्रतीत होता है। निजी स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन को भी इस आदेश को गंभीरता से लेना चाहिए और कक्षाएं दोबारा शुरू करने से पहले भवनों की सुरक्षा का आकलन करवाना चाहिए।
इस दिशा में स्कूल शिक्षा निदेशालय की पहल सराहनीय है। इसलिए शिक्षण संस्थानों का संचालन करने वाले प्रबंधनों को अपने भवनों का सुरक्षा ऑडिट करवाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करनी चाहिए और जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करनी चाहिए, ताकि स्कूल खुलने में देरी के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, क्योंकि समय बहुत महत्वपूर्ण है।
जिन स्कूलों का बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां संबंधित अधिकारियों को भवनों की मरम्मत पूरी होने तक अस्थायी व्यवस्था शुरू करने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि निरीक्षण के दौरान स्कूल भवन, कक्षाओं, चारदीवारी, फर्नीचर, विद्युत प्रतिष्ठानों, पेयजल सुविधाओं, स्वच्छता ब्लॉकों, खेल मैदानों तथा संस्थान के सुरक्षित संचालन के लिए आवश्यक अन्य सभी बुनियादी ढांचे की जांच की जाएगी।
विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सक्षम प्राधिकरण द्वारा सुरक्षित घोषित किए जाने तक स्कूलों को दोबारा नहीं खोला जाना चाहिए। साथ ही, सरकार और स्कूल प्रबंधन को मिलकर निरीक्षण और मरम्मत का कार्य बिना किसी देरी के पूरा करना चाहिए, ताकि लंबे समय तक पढ़ाई प्रभावित न हो।
सुरक्षित स्कूल वातावरण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में पहला कदम है और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए कि बच्चे बिना किसी डर या जोखिम के दोबारा कक्षाओं में लौट सकें।
बाढ़ के दौरान व्यापक नुकसान झेलने वाले सरकारी स्कूलों का पुनर्निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों को ऐसे स्कूलों की तत्काल पहचान कर उनके पुनर्निर्माण के लिए निविदाएं जारी करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। शिक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि विद्यार्थियों का करियर और भविष्य इसी महत्वपूर्ण क्षेत्र पर निर्भर करता है।