निवारक स्वास्थ्य देखभाल में अग्रणी भूमिकानिभा रहा है योग
- प्रतापराव जाधव
बीते दशक में योग को केवल पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धति के रूप में ही नहीं सराहा गया, बल्कि उसे उत्तरोत्तर रूप से स्वास्थ्य और कल्याण के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण के रूप में भी पहचाना जाने लगा है। वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल नवाचारऔर वैश्विक सहयोग अब हमें योग को केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत हीनहीं, बल्कि एक सशक्त जन-स्वास्थ्यहस्तक्षेप समझने में भी मदद कर रहे हैं।
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) को पारंपरिक चिकित्सा (योग) के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्रके रूप में नामित किया गया है और योग अनुसंधान में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका और भी मज़बूती प्रदान करते हुए वर्ष 2025–2029 के लिए इसे फिर से निमित किया गया है। यह पहचान गैर-संचारी रोग (एनसीडी) के लिए साक्ष्य-आधारित योग हस्तक्षेपों को बढ़ावा देने में संस्थान की बढ़ती भूमिका को दिखाती है। इस पहल के प्रमुख साझेदारों में आयुष मंत्रालय, एम्सदिल्ली, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद, और इंस्टीट्यूट ऑफ़ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज, दिल्ली शामिल हैं।
इन सहयोगों के माध्यम से केंद्र मधुमेह, मोटापा और तनाव से संबंधित विकारों जैसे गैर-संचारी रोगों के लिए योग-आधारित हस्तक्षेपों परतकनीकी दिशानिर्देश विकसित कर रहा है और अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है। इन प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय संगठन भी साझेदारी कर रहे हैं, जिससे योग की वैज्ञानिक आधारशिला और मजबूत हो रही है तथा निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए व्यापक रूप से लागू किए जा सकने वाले, किफायती और साक्ष्य–समर्थित प्रभावी साधनके तौर पर योगकी क्षमताप्रदर्शित हो रही है।
संस्थागत स्तर परएमडीएनआईवाई योग की वैज्ञानिक आधारशिला को मजबूती प्रदान करना जारी रखे हुए है। शरीर क्रिया विज्ञान, जैव रसायन, बायोमैकेनिक्स और मनोविज्ञान की अनुसंधान प्रयोगशालाओं के माध्यम से यह संस्थान योग केमनो–शारीरिक और जैव–रासायनिक प्रभावों, उम्र बढ़ने में इसकी भूमिका तथा जीवनशैली से जुड़े विकारों पर इसके प्रभाव का अध्ययन करता है। यह कार्य पारंपरिक ज्ञान को आधुनिकवैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है
डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने योग की पहुँच को और अधिक बढ़ाया है, जिससे साक्ष्य-आधारित पद्धतियाँ सीधे लोगों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन रही हैं।m-Yoga मोबाइल एप्लिकेशन औरY-Break प्रोटोकॉल जैसे प्रयास यह दिखाते हैं कि योग की प्रामाणिकता और चिकित्सकीय महत्व बनाए रखते हुए उसे बड़े स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से विकसित किए गए m-Yogaप्लेटफॉर्मपर1.1 लाख से अधिक डाउनलोडदर्ज किए जा चुके हैं, जो सुलभ डिजिटल वेलनेस टूल्स में बढ़ती रुचि को दर्शाता है। वहीं कार्यस्थल योग कार्यक्रमY-Break — जो काम के दौरान5–10मिनट का सरल योग ब्रेकहै — से अब तक33लाख से अधिक सरकारी अधिकारियोंको लाभ मिल चुका है।
इन पहलों से प्राप्तअनुसंधान निष्कर्ष और सहभागिता विश्लेषणअत्यंत उत्साहजनक हैं। Y Break अभ्यास से कुछ ही सप्ताहों मेंअनुभूत तनावमें लगभग40 प्रतिशत तक कमीदेखी गई है। अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि इससेमानसिक सतर्कता, भावनात्मक दृढ़ता और निर्णय–क्षमतामें सुधार होता है। इसके साथ-साथकॉर्टिसोल स्तरजैसे शारीरिक संकेतकों में भी सकारात्मक परिवर्तन पाए गए हैं।
शारीरिक लाभों मेंगर्दन, कंधे और कमर के दर्द में कमी, श्वास अभ्यास से सांस लेने की क्षमता में सुधारऔरसंपूर्ण जीवन शक्ति में वृद्धिशामिल हैं—ये परिणाम विशेषकर आज केनिष्क्रिय, स्क्रीन–आधारित कार्यस्थलोंमें प्रासंगिक हैं। Y-Break अभ्यास नेअनुपस्थिति में कमी लाने , कर्मचारियों के मनोबल में सुधारलाने, और कार्य–जीवन में स्वस्थ संतुलनकायम करनेमें भी योगदान दिया है, जो व्यक्तिगत और संगठनात्मक कल्याण दोनों को मजबूतबनाने की योग की क्षमता को दर्शाता है।
एमडीएनआईवाईऔरकेंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा सम्मेलन–2026 के दौरान भी वैज्ञानिक प्रमाण के महत्व परजोर दिया गया। विशेषज्ञों ने यह रेखांकित किया किसुदृढ़ अनुसंधान, अंतरविषयक सहयोग, और प्रभावी डिजिटल सहभागिताआधुनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों में योग को एकीकृत करने और स्पष्ट स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य हैं।
ये घटनाक्रम योग के प्रतिवैश्विक दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलावको दर्शाते हैं। अब इसे केवलव्यक्तिगत कल्याण के अभ्यासके रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह उत्तरोत्तर रूप से जन–स्वास्थ्य, कौशल विकास और वेलनेस आधारित रोजगार के अवसरोंके एक मार्ग के रूप में उभर रहा है। योग परंपरा को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ जोड़ते हुएग्लोबल योग क्रांतिकीप्रेरक शक्ति के रूप में उभर रहा है तथा अंतरराष्ट्रीय वेलनेस क्षेत्र में भारत के नेतृत्व को और मजबूत कर रहा है।
जैसे-जैसे हम13 मार्चके करीब पहुँचरहे हैं, जो21 जून को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवसके100-दिन के काउंटडाउन का संकेत है, यह हमें इस बारे में सोचने का अवसर देता है कि किस प्रकार योग एक प्राचीन पद्धति से लेकर वैश्विक रूप से मान्यता प्राप्त, साक्ष्य–आधारित स्वास्थ्य और कल्याण मार्गके रूप में विकसित हो गया है। ये सौ दिन हमें याद दिलाएं कि हम दैनिक योग अभ्यास शुरू करें या उसे नवीनीकृत करें,और अपनेपरिवार, मित्रों और समुदायोंको योग को जीवन जीने का तरीकाबनाने के लिए प्रेरित करें।
योग को दैनिक जीवन में शामिल करके, हम केवलव्यक्तिगत स्वास्थ्यको ही मजबूत नहीं करते, बल्किसामूहिक कल्याण, संगठनात्मक दक्षता और सामाजिक समरसताको भी बढ़ावा देते हैं। आज, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोगके माध्यम से, भारत योग कीअनंत ज्ञान परंपराकोवैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और सार्वभौमिक रूप से सुलभ मार्गमें बदलने का अगला निर्णायक कदमउठा रहा है, जोवैश्विक स्वास्थ्य, संतुलन और कल्याणके लिए मार्गदर्शक बन सकेगा।
(लेखक आयुष मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार वाले केंद्रीय राज्य मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री हैं।)