निर्माण स्थलों को सुरक्षित बनाएं, नियमों का पालन करें

0

 

यह सचमुच चिंताजनक है कि देशभर में निर्माणाधीन पुलों और फ्लाईओवरों के गिरने की कई घटनाओं के बावजूद जम्मू में एक पुराने पुल की मरम्मत बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के करने की अनुमति दे दी गई। बताया जा रहा है कि ठठार क्षेत्र में पुल गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक को जीवित बचा लिया गया। एक अन्य मजदूर अभी भी लापता है और बचाव दल उसकी तलाश में जुटा हुआ है।

गौरतलब है कि यह पुल काफी पुराना था और पिछले वर्ष अगस्त-सितंबर में आई बाढ़ के दौरान इसकी दीवारों में दरारें आ गई थीं। पुल के गिरने के बाद उसकी मरम्मत में लगे चार मजदूर मलबे में दब गए। अब बड़ा सवाल यह है कि उच्च अधिकारियों ने इस पुल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए निर्माण विशेषज्ञों को क्यों शामिल नहीं किया, जबकि यह गिरने की कगार पर था।

यह घटना संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदारों की स्पष्ट लापरवाही को दर्शाती है। सरकार को पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देना चाहिए और इस मामले में जवाबदेही तय करते हुए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। इस घटना में सरकार भी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती, क्योंकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

यह त्रासदी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों के दौरान बुनियादी सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने में सरकार विफल रही है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर सड़कों और फ्लाईओवरों का निर्माण चल रहा है, इसलिए यह समय है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सभी स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

इस मामले में स्पष्ट रूप से निगरानी और जवाबदेही की कमी रही, जिसके कारण यह हादसा हुआ। यदि अनिवार्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता, तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था। उचित जोखिम मूल्यांकन और संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट की कमी इस पूरे मामले में प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करती है।

देश के अन्य राज्यों में हुई ऐसी घटनाओं की तरह यह हादसा भी एक चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए, ताकि सख्त सुरक्षा नियम लागू किए जा सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि विकास मानव जीवन की कीमत पर न हो।

अंततः, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।

Leave A Reply

Your email address will not be published.