## तनावमुक्त परीक्षा का मंत्र

0

 

 

जैसे-जैसे परीक्षा का मौसम नज़दीक आ रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत लोकप्रिय संवादात्मक कार्यक्रम **“परीक्षा पे चर्चा”** का 9वां संस्करण देशभर के बच्चों के लिए एक अत्यंत प्रासंगिक संदेश लेकर आया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को परीक्षा के दौरान तनाव और चिंता से दूर रखते हुए आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में बैठने के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि परीक्षा के समय तनाव कई बार छात्रों के प्रदर्शन में बाधा बन जाता है।

 

यह कार्यक्रम 4.5 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक अनूठा अनुभव रहा, जिन्होंने मायगव पोर्टल के माध्यम से इसके लिए पंजीकरण कराया। प्रधानमंत्री ने अपने बचपन से लेकर वर्तमान तक के जीवन अनुभवों से प्राप्त समझ के आधार पर इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा किए।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने विशिष्ट और प्रभावशाली अंदाज़ में छात्रों को अपनी **अद्वितीय सीखने की शैली पर भरोसा रखने** की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोई भी दो व्यक्ति एक जैसे नहीं सोचते और न ही एक ही तरीके से विकसित होते हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी अलग तैयारी शैली होती है और उस पर पूर्ण विश्वास रखना अत्यंत आवश्यक है।

 

उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को शिक्षकों, माता-पिता और मार्गदर्शकों की सलाह को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए, उसे गहराई से समझना चाहिए और जो उपयोगी हो, उसे अपनाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने छात्रों को दूसरों की नकल करने के बजाय सलाह में अपने अनुभव और आत्म-समझ जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

 

यह दृष्टिकोण वैश्विक स्तर पर भी अनूठा है, क्योंकि विभिन्न देशों के शीर्ष नेतृत्व में इस तरह का सीधा और संवेदनशील संवाद दुर्लभ देखने को मिलता है। आने वाली पीढ़ी के राष्ट्र-निर्माताओं के लिए समय निकालना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाना, युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में प्रवाहित कर राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

कुल मिलाकर, **“परीक्षा पे चर्चा”** की परिकल्पना अपने आप में समयानुकूल और सार्थक है। यह बच्चों में सकारात्मक सोच विकसित करने, अनुशासित दिनचर्या अपनाने और परीक्षा अवधि के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर देता है, जो युवा पीढ़ी के भविष्य को आकार देने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

 

प्रधानमंत्री का संदेश अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सलाह दी कि हर बच्चे की सीखने की गति को समझते हुए संवेदनशील बने रहें। विशेष रूप से शिक्षकों के लिए यह संदेश अत्यंत महत्वपूर्ण था कि वे छात्रों से केवल एक कदम आगे रहें, बहुत अधिक नहीं, ताकि मार्गदर्शन सहज और प्रेरणादायक बना रहे, न कि भय पैदा करने वाला।

 

प्रधानमंत्री की **“परीक्षा पे चर्चा”** की महत्ता को देखते हुए यह हम सभी की जिम्मेदारी बनती है कि इस संदेश का सार उन लोगों तक भी पहुँचाया जाए जो किसी कारणवश इस कार्यक्रम से जुड़ नहीं पाए। यह संदेश सार्वभौमिक महत्व का है और देश का कोई भी नागरिक प्रधानमंत्री द्वारा किए गए इस प्रेरक प्रयास से अनभिज्ञ नहीं रहना चाहिए।

Leave A Reply

Your email address will not be published.