जल शक्ति मंत्री ने श्रीनगर में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की
श्रीनगर 05 सितम्बर। जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने नागरिक सचिवालय में बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें उन्होंने कश्मीर में हाल ही में आई बाढ़ की स्थिति और इससे निपटने के लिए चल रहे कार्यों की समीक्षा की।
बैठक में जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शालीन काबरा तथा सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग सहित संबद्ध विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने चल रहे बाढ़ संकट से निपटने के लिए समन्वित और बहुआयामी प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
मंत्री राणा ने प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित राहत पहुँचाने और बिजली, पानी की आपूर्ति तथा सड़क संपर्क जैसी आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रीनगर शहर और आसपास के डूबे हुए इलाकों से पानी निकासी के लिए समन्वित और सक्रिय कार्यवाही की आवश्यकता बताई। उन्होंने उपयुक्त स्थानों पर तुरंत पर्याप्त पंपिंग मशीनरी की तैनाती करने का आह्वान किया ताकि रुका हुआ पानी शीघ्र निकाला जा सके।
मंत्री ने कहा कि इन कदमों से आवश्यक सेवाओं की बहाली होगी और लोग जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट पाएंगे। उन्होंने झेलम नदी के जल स्तर के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा, खासकर उसकी सहायक नालियों से बढ़ रहे जल प्रवाह को देखते हुए।
वर्तमान संकट को कम करने के साथ-साथ, राणा ने दीर्घकालीन स्तर पर बाढ़ प्रबंधन तंत्र को संस्थागत रूप से मज़बूत करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचा जा सके।
उन्होंने कमजोर तटबंधों को मज़बूत करने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन और मशीनरी तैनात करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों को संभावित खतरे के बारे में पहले से सूचित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे समय पर सावधानी बरत सकें। उन्होंने कहा कि समय पर उठाए गए कदम ही लोगों की सुरक्षा और अनावश्यक अफ़रा-तफ़री से बचाव सुनिश्चित कर सकते हैं।
बैठक के दौरान जल शक्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने शालीना-लसजन (बडगाम) में हुए तटबंध टूटने और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर पड़े प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए गए हैं और फील्ड स्टाफ संवेदनशील तटबंधों की मजबूती के लिए स्थिति पर गहन नज़र रखे हुए है।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि प्रभावित क्षेत्रों में डीवॉटरिंग पंपों की तैनाती की गई है ताकि अतिरिक्त जल को मोड़ा जा सके और संवेदनशील बस्तियों की सतर्क निगरानी की जा रही है, जिससे निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने यह भी अवगत कराया कि क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा ढांचे की स्थायी मजबूती के लिए मध्यम एवं दीर्घकालिक उपायों को लेकर तकनीकी आकलन किया जा रहा है।