जम्मू-कश्मीर नशा पीड़ितों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास योजना शुरू करेगा:

मुख्य सचिव ने उपचार, पुनर्समावेशन और आजीविका सहायता के ढांचे की समीक्षा की

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श्रीनगर, 8 मई: जम्मू-कश्मीर सरकार नशे के शिकार लोगों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास योजना लागू करने जा रही है। इस संबंध में मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने आज संबंधित प्रशासनिक सचिवों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा तैयार व्यापक पुनर्वास योजना की समीक्षा की। यह योजना विभिन्न सरकारी विभागों और हितधारकों के परामर्श से तैयार की गई है।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त, प्रधान सचिव गृह, आयुक्त सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, आयुक्त सचिव सामाजिक कल्याण विभाग, आयुक्त सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, निदेशक कॉलेज शिक्षा, एनआईसी के राज्य सूचना अधिकारी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणाम देने वाली व्यावहारिक और मजबूत पुनर्वास रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस योजना को सभी संबंधित विभागों और नागरिक समाज के हितधारकों, विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (आईएमएचएएनएस) तथा सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मनोरोग विभागों के विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद और बेहतर बनाया जाए।

मुख्य सचिव ने पुनर्वास प्रक्रिया में मरीज मार्गदर्शकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इन मार्गदर्शकों के पास आवश्यक योग्यता होनी चाहिए तथा उन्हें आईएमएचएएनएस में विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले में कम से कम 30 से 40 प्रशिक्षित मार्गदर्शकों का समूह तैयार करने के निर्देश दिए, जो दीर्घकालिक पुनर्वास कार्यक्रम में सहयोग करेंगे।

उन्होंने कहा कि समर्पित और पेशेवर रूप से प्रशिक्षित मार्गदर्शकों का समूह इस पुनर्वास कार्यक्रम की मजबूत नींव बनेगा। उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार मार्गदर्शकों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएं ताकि वे प्रभावित व्यक्तियों के साथ प्रभावी ढंग से जुड़ सकें और उन्हें समाज में पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। उन्होंने इन मार्गदर्शकों को प्रोत्साहित करने के लिए उचित प्रोत्साहन प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया।

मुख्य सचिव ने पुनर्वास प्राप्त व्यक्तियों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सरकारी योजनाओं और संसाधनों को जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को दोबारा स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा जारी रखने में भी सहायता दी जाए। साथ ही एनआईसी को पुनर्वास प्रक्रिया की सतत निगरानी और प्रभावित व्यक्तियों के दीर्घकालिक स्थिरीकरण के लिए एक विशेष डिजिटल पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित विभागों और हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए। साथ ही वित्तीय आवश्यकताओं और निर्धारित अवधि में अपेक्षित परिणामों का भी विस्तृत आकलन किया जाए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त शैलेंद्र कुमार ने सुझाव दिया कि मरीजों को नशे की गंभीरता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाए ताकि पुनर्वास और मार्गदर्शन उसी अनुसार दिया जा सके। उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और सरकारी वित्तीय सहायता के माध्यम से भी सहयोग प्राप्त करने की बात कही।

उन्होंने विभिन्न विभागों, विशेषकर उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में उपलब्ध मनोवैज्ञानिकों की सेवाओं का उपयोग कर काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने का सुझाव भी दिया।

प्रधान सचिव गृह चंद्राकर भारती ने कहा कि पुनर्वास ढांचे को जमीनी जरूरतों के आधार पर तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल पारंपरिक सरकारी योजनाओं की पुनरावृत्ति न होकर नशा पीड़ितों और उनके परिवारों की वास्तविक जरूरतों, आकांक्षाओं और चुनौतियों के अनुरूप होना चाहिए।

इससे पहले सामाजिक कल्याण विभाग के आयुक्त सचिव सरमद हफीज ने विभिन्न विभागों और हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार प्रारंभिक पुनर्वास योजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर देश का पहला ऐसा क्षेत्र बन रहा है जहां नशा पीड़ितों के लिए दीर्घकालिक और संरचित पुनर्वास मॉडल पर काम किया जा रहा है। यह मॉडल केवल उपचार तक सीमित नहीं होगा, बल्कि मरीजों के स्थिरीकरण, सामाजिक पुनर्स्थापन और रोजगार सहायता पर भी केंद्रित रहेगा ताकि उपचार के बाद दोबारा नशे की ओर लौटने की संभावना कम हो सके।

उन्होंने प्रस्तावित तीन वर्षीय पुनर्वास ढांचे की जानकारी देते हुए कहा कि यह योजना उपचार और स्थिरीकरण, पुनर्समावेशन, रोजगार सृजन, उपचार उपरांत निगरानी और सामाजिक समावेशन के सिद्धांतों पर आधारित होगी।

आयुक्त सचिव ने बताया कि इस रणनीति के तहत मरीज मार्गदर्शकों को सूचीबद्ध किया जाएगा, जो निरंतर काउंसलिंग, मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग प्रदान करेंगे। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश, संभाग और जिला स्तर पर प्रस्तावित निगरानी एवं पर्यवेक्षण प्रणाली की भी जानकारी दी, ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से उपचार उपरांत निगरानी और रोजगार सहायता के विस्तृत ढांचे के साथ-साथ पुनर्वास कार्यक्रम के विभिन्न चरणों की समय-सीमा की भी जानकारी दी।

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