खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों का विस्तार जरूरी
मरह और ज्योरियन जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा दो इंडोर स्टेडियमों का उद्घाटन एक सराहनीय पहल है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और सीमा क्षेत्रों के युवाओं को उचित अवसर देने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
यह एक कड़वी सच्चाई है कि अन्य राज्यों की तुलना में जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेतृत्व युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर अधिक ध्यान देता है, जबकि खेलों के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया गया है। जम्मू और श्रीनगर जैसे दो प्रमुख शहरों को छोड़ दें तो बाकी क्षेत्रों में युवा खिलाड़ियों के पास अपने कौशल को निखारने और पहचान बनाने के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों और शहरों के आसपास के छोटे कस्बों में खेल सुविधाओं की कमी के कारण युवा पीढ़ी के लिए खेलों को करियर के रूप में अपनाना मुश्किल हो जाता है।
निस्संदेह, आधुनिक सुविधाओं से लैस नए इंडोर स्टेडियम, जिनमें शूटिंग रेंज और बहुउद्देशीय कोर्ट शामिल हैं, भविष्य के खिलाड़ियों को प्रेरित करने में सहायक होंगे। लेकिन इन सुविधाओं का दायरा सीमित है। इसलिए समय की मांग है कि जम्मू-कश्मीर के हर क्षेत्र में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जहां युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगा सकें।
सरकार द्वारा जम्मू और श्रीनगर में खेलों को बढ़ावा देने और कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने लगे हैं। यदि इसी तरह की सुविधाएं गांव स्तर तक पहुंचाई जाएं, तो इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने आएंगे, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, बल्कि कमी है तो उचित बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण के अवसरों की।
यह आवश्यक है कि उपराज्यपाल प्रशासन और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से काम करें और बच्चों व युवाओं के लिए उपयुक्त खेल सुविधाएं विकसित करें। इससे न केवल खेल प्रतिभाओं को निखारने में मदद मिलेगी, बल्कि नशे जैसी सामाजिक समस्याओं को कम करने में भी सहायता मिलेगी, क्योंकि युवाओं को अपनी क्षमता दिखाने का सही मंच मिलेगा।
अंततः, खेल न केवल उपलब्धि का माध्यम हैं, बल्कि ऊर्जा और आकांक्षाओं को सकारात्मक दिशा देने का एक सशक्त जरिया भी हैं। इसलिए नीति-निर्माताओं को चाहिए कि वे जमीनी स्तर पर खेल ढांचे के विकास, स्थानीय कोचों के प्रशिक्षण, नियमित प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेलों को सामुदायिक जीवन का हिस्सा बनाने पर ठोस कदम उठाएं। संदेश स्पष्ट है—यदि ठोस और समयबद्ध निर्णय लिए जाएं, तो इसके परिणाम निश्चित रूप से सकारात्मक होंगे।