केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने श्रीनगर में युवा मामले एवं खेल मंत्रियों के चिंतन शिविर की अध्यक्षता की

“खेलो भारत मिशन हमारे युवाओं की ऊर्जा और राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है” — डॉ. मनसुख मंडाविया

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श्रीनगर, 25 अप्रैल: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के युवा मामले एवं खेल मंत्रियों का चिंतन शिविर आज श्रीनगर में शुरू हुआ, जिसमें समन्वित प्रयास, नीतिगत सुधार और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के जरिए भारत के खेल तंत्र को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि भारत के खेल क्षेत्र की महत्वाकांक्षाएं तभी पूरी होंगी जब योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर होगा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक खेल शक्ति बनने का 10 साल का रोडमैप केवल दस्तावेज न रहे, बल्कि हर स्तर पर लागू होना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी इस अवसर पर मौजूद रहे और भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में इस पहल की सराहना की।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से नीतियों को अपनाने के साथ-साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देने को कहा और बताया कि वास्तविक प्रगति जिला स्तर और जमीनी खेल ढांचे में दिखाई देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि “खेलो भारत मिशन” केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह युवाओं की ऊर्जा और देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

डॉ. मंडाविया ने राज्यों और खेल महासंघों के बीच समन्वय की कमी को दूर करने और मजबूत प्रतिभा श्रृंखला विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली के साथ तालमेल जरूरी है ताकि शुरुआती स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान हो सके और शारीरिक शिक्षा शिक्षक इस व्यवस्था की रीढ़ हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रतिभाशाली बच्चे को अवसर नहीं मिलता, तो यह पूरे देश का नुकसान है।

उन्होंने कहा कि खेल विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

मंत्री ने कोचों के नियमित प्रमाणन, खिलाड़ियों के वैज्ञानिक प्रशिक्षण और खेल प्रशासन में क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जब बुनियादी ढांचा, प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षित मानव संसाधन एक साथ जुड़ेंगे, तब ओलंपिक में सफलता सुनिश्चित होगी।

इस अवसर पर डॉ. मंडाविया ने लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान, ग्वालियर द्वारा शुरू किए गए yes-pe (young engagement in sports & physical education) कार्यक्रम का शुभारंभ भी किया, जो 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों में खेल भागीदारी और नेतृत्व को बढ़ावा देगा।

खेल सचिव हरि रंजन राव ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह शिविर सामूहिक चिंतन और संकल्प का मंच है।

चिंतन शिविर में पदक रणनीति, नीतिगत समन्वय, स्वच्छ और सुरक्षित खेल वातावरण तथा प्रतिभा पहचान और विकास जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।

15 से अधिक राज्यों के खेल मंत्री और प्रमुख खेल हस्तियां जैसे आदिल सुमारीवाला, अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग भी इसमें शामिल हुए और अपने विचार साझा किए।

विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों ने खिलाड़ी-केंद्रित दृष्टिकोण की सराहना की और इसे पूरे देश में लागू करने की बात कही।

चर्चाओं में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कोचिंग सिस्टम को बेहतर बनाने, केंद्र-राज्य समन्वय बढ़ाने और तकनीक आधारित प्रतिभा विकास पर जोर दिया गया।

इन सत्रों में यह भी रेखांकित किया गया कि प्रतिभा पहचान से लेकर उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण तक एक मजबूत और सतत प्रणाली विकसित करना जरूरी है।

प्रतिभागियों ने नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित निगरानी, मूल्यांकन और राज्यों के बीच बेहतर अनुभव साझा करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

इस चिंतन शिविर ने एक समन्वित और समावेशी खेल तंत्र के निर्माण की दिशा में केंद्र, राज्य और सभी हितधारकों की साझा प्रतिबद्धता को दोहराया, ताकि भारत वैश्विक खेल शक्ति बन सके।

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