कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए सुरक्षा कुंजी, धार्मिक स्थलों पर सरकार का ध्यान: मुख्यमंत्री उमर

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जम्मू, 01 अप्रैल(हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी एक सुरक्षित वातावरण की बहाली पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि सरकार उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जारी रखेगी।

एक निजी विधेयक पर चर्चा के दौरान विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन एक वास्तविकता है जिससे न तो सरकार इनकार करती है और न ही कोई। उन्होंने कहा कि लगातार सरकारों ने उनकी वापसी को सुविधाजनक बनाने के प्रयास किए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी उस स्तर तक नहीं पहुंची है जहां समुदाय के सदस्य वापस आने के लिए पर्याप्त सुरक्षित महसूस करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि समुदाय की सुरक्षा की भावना गहराई से प्रभावित हुई है और किसी भी सार्थक वापसी से पहले इसका पुनर्निर्माण किया जाना चाहिए। उस विश्वास को बहाल किए बिना उनकी वापसी की उम्मीद करना यथार्थवादी नहीं होगा।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार विस्थापित समुदाय की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए कदम उठा रही है साथ ही उन्होंने कहा कि उनसे जुड़े धार्मिक स्थल प्राथमिकता बने हुए हैं और उन्हें संरक्षित किया जा रहा है। पहले के विधायी प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में ऐसी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक विधेयक पेश करने के प्रयास किए गए थे लेकिन इन्हें समुदाय के भीतर वर्गों के विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि भविष्य के किसी भी कानून में विभाजन से बचने के लिए व्यापक सहमति होनी चाहिए।

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