उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने गृह मंत्रालय (एमएचए) और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच आगामी वार्ता के संतोषजनक परिणाम की जताई उम्मीद
जम्मू, 14 जनवरी(हि.स.)। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बुधवार को गृह मंत्रालय (एमएचए) और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच आगामी वार्ता के संतोषजनक परिणाम की उम्मीद जताई और कहा कि बातचीत सभी मुद्दों को हल करने का सबसे अच्छा तरीका है।
गृह मंत्रालय ने हाल ही में जनवरी के अंत में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की अध्यक्षता में लद्दाख पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है।
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) संयुक्त रूप से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और क्षेत्र में छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा उपायों के विस्तार की मांग को लेकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं और अतीत में एचपीसी के साथ कई दौर की बातचीत कर चुके हैं।
पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के बाद वार्ता में गतिरोध आ गया था जिसमें चार नागरिकों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। केंद्र के साथ 6 अक्टूबर को होने वाली बातचीत को पहले करने के लिए दबाव डालने के लिए बुलाई गई आम हड़ताल के दौरान हिंसा भड़क उठी।
हालाँकि केंद्र द्वारा हिंसा की सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश के बाद 22 अक्टूबर को लद्दाख के प्रतिनिधियों ने एमएचए की उप-समिति के साथ बातचीत की और बैठक में निर्णय के अनुसार एमएचए को अपनी मांगों पर एक विस्तृत दस्तावेज भी सौंपा।
ऐसी बैठकें समय-समय पर आयोजित की जाती थीं। गृह मंत्रालय ने इस महीने के अंत में समिति की बैठक बुलाई है और मेरा मानना है कि सदस्यों को यह समझना चाहिए कि जो भी चर्चा की जाती है वह संविधान के ढांचे के भीतर और देश के हित में होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 2019 से लद्दाख का विशेष ध्यान रखा है जब इस क्षेत्र को जम्मू-कश्मीर से अलग किया गया और केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया।