आधुनिक खतरों के लिए नवाचार आवश्यक है**
निस्संदेह, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर अपनी सैन्य श्रेष्ठता और प्रभुत्व सिद्ध किया। इस अभियान में उन रणनीतिक ठिकानों को ध्वस्त किया गया जो जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में आतंकवाद को बढ़ावा देने में सहायक थे।
लेकिन इस सैन्य संघर्ष से देश ने यह भी सीखा कि आधुनिक युद्ध कई मायनों में बदल चुका है। पैदल सैनिकों और यहां तक कि पारंपरिक लड़ाकू विमानों की भूमिका भी पहले जैसी निर्णायक नहीं रह गई है। उनकी जगह उन्नत ड्रोन, मिसाइल प्रणालियाँ और मिसाइल व ड्रोन हमलों को रोकने वाली वायु रक्षा प्रणालियाँ प्रमुख हो गई हैं।
इन परिवर्तनों को देखते हुए यह अनिवार्य हो गया है कि भारत ऐसे रक्षा तंत्रों को और अधिक सुदृढ़ बनाने में निवेश करे—जिसमें अत्याधुनिक आक्रमणकारी ड्रोन, घातक लड़ाकू विमान और अचूक वायु रक्षा प्रणालियों का अधिग्रहण शामिल है। भारतीय रक्षा बलों ने इस सैन्य संघर्ष के दौरान दुश्मन की ओर से दागे गए प्रक्षेपास्त्रों का मुकाबला करने में असाधारण वीरता और अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ घटनाएँ ऐसी भी रहीं जब कुछ दुश्मन ड्रोन किसी तरह रक्षा पंक्ति को पार कर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर गए।
अब नीति-निर्माताओं का उद्देश्य यह होना चाहिए कि रक्षा प्रणालियों को इस प्रकार उन्नत किया जाए कि एक भी दुश्मन ड्रोन उन्हें भेदकर भारतीय क्षेत्र में नुकसान न पहुँचा सके। इसके साथ ही, देश के लिए नवीनतम उन्नत ड्रोन तकनीक हासिल करना भी अत्यंत आवश्यक हो गया है, ताकि ऐसे आक्रमण-तैयार मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) विकसित किए जा सकें जो विरोधियों के रणनीतिक ठिकानों को नष्ट कर उन्हें असहाय और शक्तिहीन बना सकें।
यद्यपि भारत इस लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है, लेकिन विश्वभर में सैन्य संघर्षों के बदलते परिदृश्य को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि इन उद्देश्यों को बिना किसी देरी या शिथिलता के तेज़ गति से पूरा किया जाए।
बताया गया है कि उत्तरी कमान के सेना कमांडर ने ड्रोन निर्माण, रखरखाव और मरम्मत के लिए स्थापित विशेषज्ञता केंद्र का दौरा किया और परिचालन तत्परता तथा तकनीकी बढ़त बनाए रखने के उद्देश्य से विकसित सुविधाओं की समीक्षा की। यह अत्यंत आवश्यक है कि सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएँ, क्योंकि आधुनिक युद्धक्षेत्र संचालन के लिए मानव रहित प्रणालियों की निरंतर सेवा-योग्यता सुनिश्चित करने वाला बुनियादी ढांचा आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
अंततः, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के अनुभव से सबक लेते हुए यह स्पष्ट है कि भविष्य के युद्ध की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए उच्च स्तर की उपकरण तत्परता और तैयारी से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए, आने वाले समय में किसी भी रक्षा चुनौती का सामना करने के लिए उन्नत तकनीक और स्वदेशी विशेषज्ञता का अधिकतम उपयोग करते हुए पूर्ण युद्ध-तत्परता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।