आतंकी गतिविधियों से जुड़े 5 और कर्मचारियों की सेवा समाप्त ; कुल संख्या 89 हुई
**जम्मू तवी, 13 जनवरी:** आतंक समर्थक नेटवर्क के खिलाफ जारी कड़ी कार्रवाई के तहत उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को आतंकवादी संगठनों से कथित संबंध रखने वाले पांच और सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 311(2)(c) के तहत की गई, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में बिना औपचारिक जांच के सेवा से बर्खास्तगी की अनुमति देता है।
इन नवीनतम बर्खास्तगियों के साथ वर्ष 2021 से अब तक आतंक से जुड़े मामलों में हटाए गए सरकारी कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 89 हो गई है। यह जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा आतंकवाद और उसके ओवरग्राउंड सपोर्ट सिस्टम के खिलाफ तेज अभियान को दर्शाता है।
सेवा से हटाए गए कर्मचारियों में शिक्षा विभाग के शिक्षक मोहम्मद इश्फाक; स्वास्थ्य विभाग के लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद रह; लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण (पीएचई) विभाग के सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर; वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ शामिल हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि यह कार्रवाई उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा आतंक के पूरे इकोसिस्टम—जिसमें ओवरग्राउंड वर्कर और सरकारी संस्थानों में घुसे तत्व शामिल हैं—को ध्वस्त करने की निर्णायक रणनीति का हिस्सा है। जांच में सामने आया कि ये कर्मचारी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और हिज्बुल मुजाहिदीन (HM) जैसे आतंकी संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे, जबकि वे सार्वजनिक राजकोष से वेतन भी प्राप्त कर रहे थे।
अधिकारी ने कहा,
“अनुच्छेद 311(2)(c) का प्रयोग सरकार की मशीनरी को आतंकवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त करने और उसकी विश्वसनीयता बहाल करने के उद्देश्य से किया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए ऐसे कड़े कदम आवश्यक हैं।”
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2013 में शिक्षक के रूप में नियुक्त मोहम्मद इश्फाक पाकिस्तान-आधारित लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था। वह पाकिस्तान में सक्रिय एक नामित आतंकी हैंडलर के लगातार संपर्क में था और उसे 2022 में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या की योजना बनाने जैसी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। योजना को अंजाम देने से पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया और उसके पास से हथियार व गोला-बारूद बरामद किए गए। जांचकर्ताओं के मुताबिक, उसने अपने शिक्षक पद का दुरुपयोग कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उग्र विचारधारा फैलाने का प्रयास किया।
बिजबेहरा के उप-जिला अस्पताल में तैनात लैब टेक्नीशियन तारिक अहमद रह के हिज्बुल मुजाहिदीन से संबंध पाए गए, जिनका एक करीबी पारिवारिक सदस्य HM का पूर्व कमांडर था। अधिकारियों ने बताया कि रह ने उस आतंकवादी को शरण देने और पाकिस्तान भागने में मदद की तथा अटारी-वाघा सीमा तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। पहले गिरफ्तारी और जमानत पर रिहाई के बावजूद खुफिया इनपुट्स से संकेत मिला कि उसने आतंकी गतिविधियों और संपर्कों को दोबारा शुरू कर दिया था।
वर्ष 1988 में सरकारी सेवा में आए पीएचई विभाग के सहायक लाइनमैन बशीर अहमद मीर पर बांदीपोरा के गुरेज क्षेत्र में लश्कर-ए-तैयबा के ओवरग्राउंड वर्कर के रूप में काम करने का आरोप है। अधिकारियों के अनुसार, वह आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट, पनाह और संवेदनशील सूचनाएं उपलब्ध कराता था। वर्ष 2021 में उसके आवास पर हुए आतंक विरोधी अभियान के दौरान दो LeT आतंकवादी मारे गए और हथियार व गोला-बारूद बरामद किया गया, जिससे उसकी भूमिका उजागर हुई।
अनंतनाग में वन विभाग के फील्ड वर्कर फारूक अहमद भट पर हिज्बुल मुजाहिदीन का सक्रिय समर्थन करने और एक वांछित आतंकवादी को पाकिस्तान भागने में मदद करने का आरोप है। जांचकर्ताओं ने बताया कि उसने अपने सरकारी पहचान पत्र का दुरुपयोग कर सुरक्षा चौकियों को पार किया और गिरफ्तारी व जमानत के बाद भी आतंक समर्थकों के संपर्क में रहा।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के ड्राइवर मोहम्मद यूसुफ के पाकिस्तान स्थित HM हैंडलरों से नियमित संपर्क पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, वह अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर आतंकियों के लिए हथियार, धन और अन्य सामग्री की ढुलाई में शामिल था। जुलाई 2024 में पुलिस ने उसके वाहन को रोका, जिसमें से हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और आतंकवादी गतिविधियों के लिए भेजी जा रही नकदी बरामद हुई।
अधिकारियों ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन आतंकवाद और उसके समर्थन ढांचे को पूरी तरह समाप्त करने के अपने संकल्प पर अडिग है और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने वाला कोई भी व्यक्ति—चाहे उसका पद या सेवा रिकॉर्ड कुछ भी हो—बख्शा नहीं जाएगा।