अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर में विकास की कमी के लिए जिम्मेदार नहीं था: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला

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**श्रीनगर, 5 जून:** जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि अनुच्छेद 370 कभी भी जम्मू-कश्मीर में विकास की कमी का कारण नहीं था। उन्होंने कहा कि इसके निरस्तीकरण के बाद भी क्षेत्र में कोई असाधारण आर्थिक परिवर्तन नहीं हुआ है।

 

‘द हिंदू हडल’ कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की विकासात्मक और आर्थिक चुनौतियां मुख्य रूप से दशकों तक चली हिंसा और अस्थिरता का परिणाम थीं, न कि उसके पूर्व विशेष संवैधानिक दर्जे का।

 

उन्होंने कहा, “अनुच्छेद 370 कभी भी जम्मू-कश्मीर में विकास की कमी का कारण नहीं था और न ही इसके हटने से अचानक बड़े पैमाने पर विकास हुआ है।”

 

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने कहा कि लगभग तीन दशकों तक चली उग्रवाद की स्थिति के कारण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा, क्योंकि इससे निवेशकों और व्यापारिक संस्थानों ने जम्मू-कश्मीर में निवेश करने से परहेज किया।

 

उमर अब्दुल्ला ने कहा, “कोई भी व्यक्ति देश के उस हिस्से में अपना पैसा निवेश नहीं करेगा जिसे वह असुरक्षित मानता हो। जम्मू-कश्मीर को घूमने या व्यापार करने के लिए असुरक्षित स्थान मानने की धारणा ने हमें नुकसान पहुंचाया, न कि अनुच्छेद 370 ने।”

 

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अनुच्छेद 370 को राजनीतिक मुद्दे के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश के अन्य हिस्सों में भी इसी प्रकार के संवैधानिक संरक्षण मौजूद हैं, लेकिन उनकी उतनी आलोचना नहीं होती।

 

अब्दुल्ला ने कहा कि लक्षद्वीप और पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों में आज भी भूमि खरीदने और प्रवेश संबंधी प्रतिबंध लागू हैं, लेकिन उन पर शायद ही कभी सवाल उठाए जाते हैं।

 

उन्होंने कहा, “सिर्फ जम्मू-कश्मीर की ही चर्चा होती थी और इस बात को मुद्दा बनाया जाता था कि वहां जमीन नहीं खरीदी जा सकती। यही वह हथियार था जिसका इस्तेमाल हमारे खिलाफ किया गया।”

 

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य का दर्जा वापस पाने के लिए किन शर्तों को पूरा करना होगा।

 

उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य राज्य का दर्जा हासिल करना है, लेकिन मुझे यह नहीं पता कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कौन-कौन से मानदंड पूरे करने होंगे।”

 

उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और बेहतर होगी, क्योंकि वर्तमान केंद्र शासित प्रदेश व्यवस्था में निर्वाचित सरकार की शक्तियां सीमित हैं।

 

उन्होंने कहा, “केंद्र शासित प्रदेश की तुलना में राज्य होना बेहतर है। हम इसी स्थिति को सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।”

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