जनगणना 2027 ‘राष्ट्रीय डिजिटल परिवर्तन मिशन’ — विकसित भारत की नींव: मुख्य सचिव

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जम्मू, 10 अप्रैल: मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण “डेटा मोड़” पर है और आगामी जनगणना 2027 केवल एक गणना अभ्यास नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय डिजिटल परिवर्तन मिशन है, जो “विकसित भारत” की मजबूत नींव तैयार करेगा।

उन्होंने ये विचार जम्मू के अभिनव थिएटर में आयोजित जनगणना 2027 शिखर सम्मेलन में व्यक्त किए। इस सम्मेलन में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, विकास भागीदार और नीति विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्होंने देश की पहली पूर्णतः डिजिटल और पेपरलेस जनगणना की तैयारी और महत्व पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि भारत अब तकनीक आधारित शासन और रीयल-टाइम डेटा के युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने 2011 की पारंपरिक जनगणना से तुलना करते हुए बताया कि नई जनगणना मोबाइल आधारित गणना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड तकनीक के उपयोग से अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज होगी।

उन्होंने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में डेटा “तेल और ईंधन” की तरह होगा और भारत की विशाल जनसंख्या इसे वैश्विक स्तर पर एआई आधारित डेटा शक्ति बना सकती है।

उन्होंने JAM ट्रिनिटी (जन धन, आधार, मोबाइल) के माध्यम से सरकारी योजनाओं के सीधे लाभ पहुंचाने और डेटा लीक को कम करने की उपलब्धियों का उल्लेख किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि अब केंद्रीकृत योजना के बजाय सूक्ष्म स्तर पर वैज्ञानिक योजना बनाई जा सकेगी, जिससे गांवों और शहरों की जरूरतों के अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार योजनाएं बेहतर बनाई जा सकेंगी।

उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि वे सभी गणनाकर्मियों का प्रशिक्षण समय पर पूरा करें, ताकि 17 मई 2026 से स्व-गणना और 1 जून से घर-घर सर्वेक्षण सुचारू रूप से शुरू किया जा सके।

उन्होंने बताया कि जनगणना के आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्तीय हिस्से और विकास योजनाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने जनगणना के दो चरणों की जानकारी दी—
पहला चरण: हाउस लिस्टिंग (17–31 मई 2026) और घर-घर सर्वे (1–30 जून 2026)
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (सितंबर 2026 से फरवरी 2027 तक)

उन्होंने बताया कि नागरिक 16 भाषाओं वाले वेब पोर्टल के माध्यम से स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे और एक नया सीएमएमएस सिस्टम पूरे कार्य की निगरानी करेगा।

यूएनएफपीए प्रतिनिधि एंड्रिया वोजनर ने कहा कि डिजिटल जनगणना की पद्धति वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही है और भारत की यह पहल समावेशी विकास को मजबूत करेगी।

यूआईडीएआई के प्रफुल कुमार सिग्तिया ने जनगणना की तुलना आधार नामांकन से करते हुए कहा कि विशाल डेटा को उपयोगी नीति में बदलना बेहद महत्वपूर्ण है और डेटा सुरक्षा के लिए मजबूत प्रणाली मौजूद है।

जी20 नीति सह-अध्यक्ष रोहित कुमार ने कहा कि यह जनगणना राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नीति निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

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