*मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर संभाग के 90 लाभार्थियों को अनुकंपा नियुक्ति आदेश वितरित किए**

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**मुख्यमंत्री ने नव-नियुक्त कर्मचारियों को ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया**

श्रीनगर, 09 अप्रैल: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज शेर-ए-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में कश्मीर संभाग के 90 लाभार्थियों को एसआरओ-43 और पुनर्वास सहायता योजना (आरएएस) के तहत नियुक्ति आदेश औपचारिक रूप से वितरित किए।

ये नियुक्तियां अनुकंपा के आधार पर की गई हैं, जिनका उद्देश्य उन परिवारों को आवश्यक रोजगार सहायता प्रदान करना है जिन्होंने अपने मुख्य कमाने वाले सदस्य को खो दिया है। यह सरकार की उन परिवारों के साथ हर मुश्किल घड़ी में खड़े रहने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लोगों के साथ “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़े रहने का ईमानदार प्रयास किया है, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्होंने व्यक्तिगत त्रासदी का सामना किया है।

उन्होंने कहा कि जहां सरकारी नौकरी पाना गर्व और खुशी का क्षण होता है, वहीं जिन परिस्थितियों में ये नियुक्तियां दी जाती हैं, वे अत्यंत पीड़ादायक होती हैं।

उन्होंने कहा, “कुछ लोग परीक्षाओं और साक्षात्कारों के माध्यम से सरकारी नौकरी प्राप्त करते हैं, लेकिन आपने किसी भी परीक्षा से कहीं बड़ा बलिदान दिया है। आपने अपने किसी प्रियजन को खोया है, जो अब आपके बीच नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रियजन के खोने की भरपाई कोई भी मुआवजा नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी विकल्प दिया जाए, तो कोई भी व्यक्ति नौकरी के बदले अपने खोए हुए परिजन की वापसी ही चाहेगा।

प्रणालीगत सुधारों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआरओ-43 से पुनर्वास सहायता योजना में बदलाव का उद्देश्य संरचनात्मक कमियों को दूर करना और कार्यप्रणाली में सुधार लाना था।

उन्होंने इस प्रक्रिया में होने वाली देरी को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि बाधाओं को दूर करने के लिए और प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा, “आज भी प्रणाली में कुछ कमियां हैं, जिन्हें हम दूर करने का प्रयास करेंगे। हमें पता है कि मंजूरी और प्रक्रियाओं में देरी आपकी कठिनाइयों को बढ़ाती है। हम इस प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।”

लाभार्थियों की स्थिति को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे परिवारों को जटिल प्रक्रियाओं से गुजरने के लिए मजबूर करना अन्याय के समान है।

उन्होंने कहा, “इतनी बड़ी क्षति के बाद यदि लोगों को दफ्तर-दफ्तर भटकना पड़े, तो यह बहुत बड़ा अन्याय है। हम इसे समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

नव-नियुक्त कर्मचारियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने इस अवसर को उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत बताया और उन्हें ईमानदारी व निष्ठा के साथ जनसेवा करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल जनता के जनादेश पर निर्भर करता है, जबकि सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारी दीर्घकालिक होती है और उन्हें लंबे समय तक लोगों की सेवा करनी होती है।

उन्होंने सलाह दी, “आज से सेवानिवृत्ति तक आप लोगों की सेवा करेंगे। हमेशा आसान रास्ते के बजाय सही और कठिन रास्ते का चयन करें।”

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