**मुख्य सचिव ने D-BRAP 2025 के तहत लंबित सुधारों में तेजी लाने के निर्देश दिए**

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**जम्मू, 02 अप्रैल:** मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने आज जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों और विभागों में जिला व्यवसाय सुधार कार्ययोजना (D-BRAP)-2025 के तहत हुई प्रगति की समीक्षा के लिए एक बैठक आयोजित की। ये सुधार उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के मार्गदर्शन में लागू किए जा रहे हैं।

यह बैठक उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा समन्वित की गई, जिसमें संबंधित प्रशासनिक सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, निदेशक उद्योग जम्मू तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

विभागवार सेवाओं और D-BRAP के तहत निर्धारित सुधार मानकों की विस्तृत समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने इन सुधारों के महत्व पर जोर दिया, जो नागरिकों के कल्याण को बढ़ाने और केंद्र शासित प्रदेश में अनुकूल व्यावसायिक वातावरण बनाने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल जमीनी स्तर पर ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ दोनों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण है।

मुख्य सचिव ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को निर्देश दिए कि वे अन्य विभागों और जिला प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत करें। उन्होंने कहा कि अधिकांश सुधारों का पालन किया जा चुका है, लेकिन शेष बिंदुओं को समय पर पूरा करने के लिए विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।

उन्होंने विभागों और जिलों में क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि लंबित सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। साथ ही, उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने कार्यालयों में एक वरिष्ठ अधिकारी को D-BRAP के कार्यान्वयन की दैनिक निगरानी के लिए नियुक्त करें, ताकि किसी भी प्रकार की बाधा या देरी से बचा जा सके।

सुधार-आधारित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अगले कुछ महीनों के भीतर सभी निर्धारित सुधारों का 100 प्रतिशत कार्यान्वयन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सुधारों की गति को बनाए रखना और ठोस परिणाम प्राप्त करना आवश्यक है।

उन्होंने जमीनी स्तर से लेकर उच्च प्रशासनिक स्तर तक समन्वय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये सुधार प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनुपालन बोझ को कम करने और सेवा वितरण तंत्र को बेहतर बनाने के माध्यम से नागरिकों और व्यवसायों को वास्तविक और मापनीय लाभ पहुंचाने चाहिए।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सचिव विक्रमजीत सिंह ने D-BRAP के समग्र ढांचे की जानकारी देते हुए बताया कि DPIIT ने 15 विभागों की 46 सेवाओं को अनिवार्य रूप से डिजिटाइज करने के लिए चिन्हित किया है।

उन्होंने बताया कि विभाग ने एक समर्पित सेवा डैशबोर्ड विकसित किया है, जिसकी पहुंच सभी उपायुक्तों को दी गई है, जिससे JKSW पोर्टल के माध्यम से सेवा वितरण की रियल-टाइम निगरानी संभव हो रही है। इसके अलावा, प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्तों और विभागीय नोडल अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।

इस अवसर पर निदेशक उद्योग, जम्मू अरुण मनहास ने विभागवार सेवाओं के वर्गीकरण की जानकारी दी और विभागों व जिला प्रशासन की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया। उन्होंने सेवाओं की वर्तमान ऑनलाइन स्थिति और PSGA अधिसूचना की स्थिति भी प्रस्तुत की।

बैठक में बताया गया कि DPIIT के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विकसित रियल-टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड ई-सेवाओं और निरीक्षण मॉड्यूल से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाता है, जिससे प्रभावी निगरानी और प्रदर्शन मूल्यांकन संभव हो रहा है।

यह भी बताया गया कि DPIIT ने D-BRAP 2025 शुरू किया है, जिसमें 154 सुधार बिंदु शामिल हैं, जिन्हें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जाना है। जम्मू-कश्मीर में विभागों को नई सेवाएं विकसित करने या मौजूदा सेवाओं को उन्नत करने का कार्य सौंपा गया है, ताकि पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। अधिकांश सुधार बिंदुओं पर पहले ही महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की जा चुकी है।

D-BRAP ढांचा नागरिक-केंद्रित और व्यवसाय से संबंधित विभिन्न सेवाओं को शामिल करता है, जैसे भूमि सीमांकन, भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति, संपत्ति पंजीकरण और म्यूटेशन, भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण, शैक्षणिक संस्थानों की स्वीकृति तथा मंडी लाइसेंस जारी करना आदि।

इसके अतिरिक्त, इन सुधारों के तहत स्वास्थ्य संस्थानों, परिवहन सेवाओं, बिजली और पानी के कनेक्शन, भवन नक्शा स्वीकृति, वेंडिंग प्रमाणपत्र, पार्किंग लाइसेंस और विभिन्न नियामक ढांचों के अंतर्गत पंजीकरण के लिए लाइसेंस और परमिट ऑनलाइन जारी करने का प्रावधान भी शामिल है।

इस कार्ययोजना में जिला उद्योग केंद्रों को मजबूत बनाने और औद्योगिक पार्कों के विकास को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि क्षेत्र-विशेष निवेश आकर्षित किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य जिला स्तर पर निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करना और जम्मू-कश्मीर में सतत आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है।

मुख्य सचिव ने दोहराया कि ये सुधार डिजिटलीकरण, पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा वितरण के माध्यम से शासन प्रणाली को बदलने के उद्देश्य से हैं, जिससे जम्मू-कश्मीर को एक प्रतिस्पर्धी और निवेश के लिए तैयार क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जा सके।

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