विद्युत क्षेत्र में भारत के नेतृत्वकारी क्षमता की राहबुलंदकरना: नई विकास गाथाको ऊर्जा प्रदान कर रहा है भारत

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  • श्री मनोहर लाल

प्राचीन प्रार्थना “तमसो मा ज्योतिर्गमय” –अर्थात हमें अंधकार सेप्रकाश की ओर ले चलो – केवल आध्यात्मिक आकांक्षाभरनहीं, अपितुआधुनिक भारत कीगाथाको भी दर्शातीहै।बीते दशकमें, कभी लगातारकमी सेपरिभाषित होने वाले विद्युत इकोसिस्‍टम को दुनिया के सबसेतेज़ी से बढ़ते, सबसेवैविध्‍यपूर्ण  और सुधार-प्रेरितविद्युतबाज़ारों में सेएक में परिवर्तित करहमने इस आदर्श भावना को वास्तविकता में बदल दिया है।

जैसे-जैसेभारत स्वयं को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र, उभरती हुई डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जाकी दिशा में जिम्मेदार नेतृत्वकर्ताके रूप में स्थापित कर रहा है, वैसे-वैसेविद्युत क्षेत्र हमारी राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता की आधारशिला बन गया है।

पिछलेदशक में, हमनेउत्पादन औरपारेषणक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससेराष्ट्रीय ऊर्जा की कमी वित्त वर्ष2013–14 में4.2% से घटकरवित्त वर्ष2025–26 तकमात्र0.03% रहगई है। केवल वित्त वर्ष2025–26 मेंही (जनवरी2026 तक), सभीस्रोतों से रिकॉर्ड52.53 गीगावाटक्षमता जोड़ी गई है, जोएक ही वर्ष मेंजोड़ी गई अबतक कीसर्वाधिक क्षमता है, जिसने  2024–25 मेंस्थापित34.05 गीगावाटके पिछले सर्वोच्च स्तर को भी पार करलियाहै। कुल विद्युत उत्पादन वित्तवर्ष2014 में1,020.2 बीयू से बढ़कर वित्त वर्ष2025 में1,830 बीयू होगया है।  प्रति व्यक्ति खपत2014 में957 किलोवाट-घंटेसे बढ़कर2025 में1,460 किलोवाट-घंटाहो गई है, जोआर्थिक विकास और बेहतरपहुँचको दर्शाती है। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि हर घर, खेत और उद्योगके पासउसकी आवश्यकता केअनुसार विश्वसनीयविद्युत उपलब्‍ध हो  औरभारत अब दुनिया मेंविद्युतका तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता बन गया है।

यद्यपि हम520 गीगावाट से अधिकविद्युत उत्‍पादितकरने में सक्षमहैं, लेकिन किसीभी प्रणाली की असली परीक्षा अधिकतम मांगया पीक लोड को बिनाकिसी तरह के संचालनात्मकदबाव के संभालसकने की उसकी क्षमता होती है।साल 2024 कीगर्मियों में अधिकतम मांग रिकॉर्ड250 गीगावाटतक पहुँच गई थी और वित्त वर्ष2025–26 मेंयह242.49 गीगावाटरही।इससे पहलेमांगमें इस तरह की वृद्धिसे ग्रिड पर दबाव पड़ सकता था, लेकिनहमारे लोड डिस्पैच केंद्रों ने लगभग शून्य ऊर्जा हानि के साथ इसे सफलतापूर्वकप्रबंधित किया। यह मजबूती दुनिया के सबसे बड़े समकालिक ग्रिडों में से एक के कारणसंभव हुई है, जिसमें120 गीगावाटअंतर-क्षेत्रीय स्थानांतरण क्षमता है, जोदेश को “एक राष्ट्र-एक ग्रिड-एक फ्रीक्वेंसी” में एकीकृत करती है।

प्रेरणादायक बात केवल यह नहीं है कि हमकितनीविद्युत का उत्‍पादन करते हैं, बल्कि यह भी है कि हम उसे कैसेउत्‍पादितकरते हैं।गैर-जीवाश्म ईंधनपर आधारितक्षमता काअंशतेजी से बढ़ा है, जिसकी बदौलत भारत50% संचयी गैर-जीवाश्म ईंधनपर आधारित विद्युतक्षमताहासिल करने केअपने एनडीसी लक्ष्य को निर्धारित समय से लगभग पाँच वर्ष पहले ही हासिलकरने में समर्थ हो सका है।यह स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और जलवायुके प्रति हमारीसंकल्‍पबद्धता को दर्शाताहै।

2014 से, मिशनमोड योजनाओं के माध्यम सेविद्युत क्षेत्र को नए रूप में ढाला गया है, जिन्होंनेपहुँचका विस्तार करतेहुए सतत परिवर्तन को भी गति दी है। दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजनाने भारत के हर गांवतक बिजली पहुँचायी, इसके बाद सौभाग्य योजना आई, जिसने लाखों घरोंको बिजली से रोशन किया औरऊर्जातक पहुँच को सभीके लिए वास्तविकता बना दिया।

एकअन्य परिवर्तनकारी सुधार सितंबर2025 मेंसमान आईएसटीएस सबस्टेशनोंपर सौर और गैर-सौर घंटों के लिए अलग-अलग कनेक्टिविटी की शुरुआत है। सौर परियोजनाओंको सौर घंटों के दौरानपहुँचमिलती है, जबकिभंडारण और पवन परियोजनाओं को गैर-सौर घंटों मेंपहुँच मिलती है। इससे बड़ीमात्रा में अप्रयुक्तपारेषणक्षमता का उपयोग संभव होता है, अतिरिक्त लाइनों की आवश्यकता के बिना नवीकरणीय और भंडारण परियोजनाओं के कमीशनिंग में तेजी आती है, पारेषणलागत घटती है औरसंसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।

डिजिटलसशक्तिकरण हमारे आधुनिकीकरण कीगाथाका महत्वपूर्णअंशहै। संशोधितवितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत 3.03 लाख करोड़रुपये के खर्च के साथ हम पूरे देश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लागू कररहे हैं, जिससेउपयोगिताओं और नागरिकों के बीच संबंधों में परिवर्तन आ रहा है। इस योजना केसकारात्मक परिणाम भी सामने आचुकेहैं: एटी एंड सी हानियां2021 में21.91% सेघटकर2025 में15.04% होगई हैं, औरप्रति यूनिट आपूर्ति पर अंडर-रिकवरी69 पैसेसे घटकर6 पैसेरह गई है।

जैसे-जैसेहमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है, भविष्य की मांग का पूर्वानुमान लगानाभी उतना हीमहत्वपूर्ण है,जितना कि वर्तमानमांग काप्रबंधन करना। डेटा सेंटर की क्षमता2030 तक1.4 गीगावाट सेबढ़कर9 गीगावाटहोने का अनुमान है, औरकेवल ये सुविधाएँ ही भारत की कुलविद्युतखपतकेलगभग3% का उपयोग कर सकतीहैं।

हमाराअगला लक्ष्य एआई, अनुसंधानएवं विकास और अन्य प्रौद्योगिकी-संचालित इकोसिस्टम से उत्पन्नविद्युतकी विशाल औरलगातार बढ़ती मांग कोनिरंतर रूपसे पूरा करना है। जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, ऊर्जा भंडारण अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।भारत तेजी से बढ़ती डिजिटल अवसंरचनाको स्वच्छ ऊर्जा से संचालितकरने के लिए पम्प्डस्टोरेज परियोजनाओं और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का बड़े पैमाने पर विकास कररहा है।राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन भारत को स्वच्छ ईंधनों के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, ग्रिड स्थिरता और नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक पैठ को बढ़ावा दे रहा है।

हमपरमाणु ऊर्जाके क्षेत्र मेंभी निर्णायक कदम उठा रहे हैं, जोकम कार्बन और विश्वसनीयपावर मिक्‍सका एक आवश्यक हिस्सा है।2047 तक100 गीगावाटपरमाणु क्षमता का हमारा लक्ष्य औरSHANTI अधिनियम, 2025, हमारी तकनीकी संप्रभुता को प्रमाणितकरते हैं और निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए कानूनी व नीतिगतढाँचा तैयार करतेहैं। अब हमें जो चाहिए, औरजिसे यहसमिटउत्प्रेरित कर सकता है, वहहै तकनीक, वित्तऔर आपूर्ति श्रृंखलाओं में वैश्विक साझेदारियाँ।

विकसितभारत को ऊर्जा प्रदान करने, ग्‍लोबलसाउथ मेंविद्युतीकरण को तेज करने औरमजबूत, भविष्य-सक्षमऊर्जा तंत्र बनाने के लिए, हमेंमहत्वाकांक्षा तक सीमितन रह कर, समन्वित कार्रवाईकी दिशा में आगे बढ़ना होगा।यही वह समय है जब सरकारें, उद्योग जगत के दिग्‍गज, नवप्रवर्तनकर्ता और वैश्विक साझेदार मिलकर एक ऐसी नई ऊर्जा संरचना का निर्माण करें—जो स्वच्छ, विश्वसनीय, डिजिटल रूप से एकीकृत और वैश्विक रूप से आपस में जुड़ी हुई हो। भारत को सीमा-पार विद्युत सहयोग कानेतृत्व करना चाहिए; अगलीपीढ़ी केपारेषण, डिजिटल ग्रिड इंटेलिजेंस औरओएसओडब्ल्यूओजी -संरेखितबाजार तंत्र में साहसपूर्वक निवेश करना चाहिए; और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोपावर नवाचार, लचीले गैस संसाधनोंऔर स्वच्छ ऊर्जाकात्वरितउपयोग करनाचाहिए। इस गति कोट्रांसमिशन सिस्टम ऑपरेटर और डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम ऑपरेटर के बीच मजबूत समन्वय और2047 तक के लिएएकीकृत पावर सेक्टर रोडमैप द्वारा और भी सुदृढ़ किया जाना चाहिए, जो भारत कोमजबूत, टिकाऊऔर किफायतीविद्युतीकरण का वैश्विक मॉडल बनाए।

इस पृष्ठभूमि में, नई दिल्ली में आयोजित भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 विशेष महत्व रखता है। यह ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है जब राष्ट्र टिकाऊ, सुरक्षित और प्रौद्योगिकी-संचालित विद्युत तंत्र की दिशा में अपने संक्रमण को तेज कर रहा है।

“विकास को विद्युतीकृत करना, टिकाऊ भविष्य को मजबूत बनाना और दुनिया से जुड़ना” (अर्थात इलेक्ट्रिफाइंग ग्रोथ, एम्पावरिंग सस्टेनेबिलिटी, कनेक्टिंग ग्लोबली)विषय के साथ, यहसमिट विभिन्न हितधारकों को एक मंच परलाते हुए वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में भारत कीनेतृत्वकारी  क्षमता को प्रदर्शित करेगा। यह बुनियादी ढाँचे केआधुनिकीकरण, नवीकरणीय क्षमताके विस्तार और ग्रिडविश्वसनीयताको मजबूतकरने की भारत की प्रतिबद्धता कोरेखांकितकरेगा।यहसमिट सहयोग, नीतिगतसंवाद और निवेश जुटाने के लिएराष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तर पर एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करेगा।

हमारा अनुमान है कि2032 तक विद्युत उत्पादन में345 बिलियन डॉलर औरपारेषणएवं वितरण में68 बिलियन डॉलर से अधिक कानिवेश संभावित है, जबकिकेवल ऊर्जा भंडारण में ही35 बिलियन डॉलर से अधिक काअवसर मौजूद है। यह वास्तविक मांग पर आधारित है, क्योंकि भारत की कुल उत्पादन क्षमता पहले ही520 गीगावाट से अधिक है और तेजी से बढ़ रही है, साथ ही ग्रिडके उत्सर्जन तीव्रताघट रही है।

आइए, हम सभी एकजुट होकर विकसित भारत को ऊर्जा प्रदान करें और ग्‍लोबल साउथ की साझा समृद्धि के मार्ग को आलोकित करें।

 

(लेखक भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत मंत्री हैं)

 

 

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