सर्वाइकल कैंसर जागरूगता माहः जानलेवा बीमारी पर पूर्ण विराम की तैयारी
विश्वजीत भट्ट
नये भारतीय टीके का गंभीरता से इस्तेमाल हो और डब्ल्यूएचओ के निर्देशों के अनुपालन
में केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारें भी कारगर कदम उठाएं तो बच्चेदानी के मुंह के कैंसर
पर पूर्ण विराम लग जाएगा। इस जानलेवा बीमारी का खात्मा हो सकता है। कैंसर रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार आयुष्मान भारत योजना से
जोड़कर टीकाकरण अभियान चलाए और राज्य सरकारें इसी योजना के तहत केंद्र सरकार से मिले
फंड का इस्तेमाल करके ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में नौ से 14 साल की बच्चियों और
किशोरियों का टीकाकरण कराएं तो यह क्रांतिकारी कदम होगा। इस टीके की दो खुराक एक
आज और दूसरा छह महीने बाद देनी होती है। यदि किसी कारण से 14 साल की उम्र तक की किशोरियों
को टीका नहीं दिया जा सका तो 15 साल की उम्र से शुरू करके 26 साल की उम्र तक तीन खुराक
एक आज, दूसरा एक या दो महीने बाद और तीसरा छह महीने बाद देना है।
क्या है डब्ल्यूएचओ का निर्देश
जनवरी सर्वाइकल
कैंसर जागरूगता माह है। डब्ल्यूएचओ ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वर्ष 2030 तक सर्वाइकल
कैंसर को पूरी तरह से समाप्त कर देना है। इसके लिए भारत की 90 प्रतिशत बच्चियों और
किशोरियों को हर हाल में टीका लगाना है। 70 प्रतिशत ऐसी महिलाएं जो 30 साल से अधिक
उम्र की हैं, उनकी स्क्रीनिंग करवानी है। पहली स्क्रीनिंग 35 साल की उम्र में और दूसरी
45 साल की उम्र में। ताकि शुरुआती अवस्था में ही प्री कैंसरस का पता लगाकर इलाज किया
जा सके। 90 प्रतिशत ऐसी महिलाएं जिन्हें बच्चेदानी के मुंह का कैंसर हो गया है उन्हें
हर हाल में इलाज मिले सरकार को यह सुनिश्चित करना है, ऐसा डब्ल्यूएचओं का निर्देश
है।
केंद्र सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट तहत
की शुरुआत
सर्वाइकल
कैंसर पर पूर्ण विराम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने पायलट प्राजेक्ट के रूप में देश
के छह राज्यों में स्कूल जाने वाली नौ साल की छात्राओं का टीकाकरण कराया है। इसके साथ
ही देश के 100 जिलों में 30 साल से अधिक की उम्र की महिलाओं की स्क्रीनिंग कराई गई है।
ताकि 30 से अधिक की उम्र की महिला का यदि बच्चेदानी के मुंह का कैंसर हो गया है तो
शुरुआती दौर में सटीक इलाज से महिला का स्वस्थ किया जा सके।
ये है रामबाण भारतीय टीका
सर्वाइकल
कैंसर पर पूर्ण विराम लगाने के लिए सीरम इंटीट्यूट ने भारतीय टीका ईजाद किया है उसका
नाम है सर्वावैक। इसकी कीमत एक हजार रुपये से भी कम है। यह टीका सर्वाइकल कैंसर के
सबसे खतरनाक वेरिएंट एचपीवी, 6, 11, 16 और 18 को पूरी तरह से समाप्त करता है। इतना
ही नहीं यह दुनियां का पहला ऐसा टीका है जो सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ वेजाइना, वल्वा,
एनल, ओरो फेरिंग्स और पेनिस के कैंसर को भी पूरी तरह से समाप्त करता है।
अभी सर्वसुलभ नहीं हुआ है टीका
सर्वावैक
टीका बाजार में आ चुका है लेकिन अभी सर्वसुलभ नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की गाइडलाइन
का इंतजार हो रहा है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार की मानें तो केंद्र सरकार की योजना है कि इस टीके
को भी टीकारण अभियान के साथ जोड़ दिया जाए, ताकि ये सर्वसुलभ हो और बिना कोई कीमत चुकाए
गरीब से गरीब महिला भी बच्चेदानी के मुंह के कैंसर से बचने के लिए आसानी से यह टीका
लगवा सके।
इस कारण होता है बच्चेदानी के मुंह
का कैंसर
ह्यूमन पैपीलोमा
वायरस-एचपीवी की 200 प्रजातियां हैं। इनमें से 15 कैंसर कारक हैं। इन 15 वायरस को तीन
श्रेणियों में बांटा गया है।
-लो रिस्क : एचपीवी, 6, 11, 42, 43 व 44
-मीडियम रिस्क : एचपीवी, 31, 33, 35, 52 व 58
-हाई रिस्क : एचपीवी, 16, 18, 45 व 56
डॉ. अमित
कुमार बताते हैं कि भारत में एचपीवी, 16 व 18 वायरस 83 प्रतिशत कैंसर का कारक है। एचपीवी,
31, 33, 35, 45 व 58 वायरस 15 प्रतिशत कैंसर कारक है। इन दोनों को मिलाकर 98 प्रतिशत
होता है। इसलिए चिकित्सक ये मानते हैं कि इन्हीं दोनों से 100 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर
होता है।
झारखंड की स्थिति बेहद चिंताजनक
डॉ. अमित
कुमार बताते हैं कि झारखंड की कुल महिला आबादी की 20 प्रतिशत महिलाएं सर्वाइकल कैंसर
से पीड़ित हैं। ये आंकड़ा अस्पतालों तक पहुंचने वाली महिलाओं का है। जबकि गंभीरता से
स्क्रीनिंग की जाए तो ये आंकड़ा बहुत बढ़ जाएगा। जानकारी के अभाव में गांवों की महिलाएं
अस्पतालों तक पहुंच ही नहीं पातीं। उन्हें कब सर्वाइकल कैंसर हुआ और कब उनकी मौत हो
गई, ये बात गांवों तक ही सीमित रह जाती है।