पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सुदृढ़ करें
जम्मू शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में दिन-प्रतिदिन बढ़ते वाहन घनत्व के कारण पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो गया है, क्योंकि तेज़ गति से चलते यातायात के बीच सड़कों पर चलना अब उनके लिए जोखिम भरा हो गया है। यह उल्लेखनीय है कि पश्चिमी देशों तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपीय देशों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, जहाँ पैदल चलने वालों को पहला अधिकार मिलता है और वाहन चालकों से अपेक्षा की जाती है कि वे उनके लिए गति कम करें या रुक जाएँ। इसके विपरीत भारत में, विशेषकर जम्मू-कश्मीर में, पैदल यात्रियों को अपनी सुरक्षा स्वयं करनी पड़ती है क्योंकि वाहन चालक प्रायः उनकी सुरक्षा को महत्व नहीं देते।
यह एक गंभीर मुद्दा है और सरकार को जम्मू क्षेत्र ही नहीं बल्कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून लागू करने चाहिए। फुटपाथों और सड़कों के किनारों पर अतिक्रमण की समस्या ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रूप से चलने की जगह बहुत कम रह गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन पर्याप्त फुटपाथ, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, पैदल यात्री संकेत और गति सीमा की व्यवस्था करे, विशेष रूप से उन स्थानों पर जहाँ पैदल आवाजाही अधिक होती है, जैसे स्कूलों, अस्पतालों और व्यस्त बाजारों के आसपास। साथ ही अतिक्रमणकारियों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर और उदाहरणात्मक कार्रवाई करना भी अनिवार्य है, क्योंकि ये दोनों ही पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
सबसे बढ़कर, समाज के सभी वर्गों—जिसमें पैदल यात्री भी शामिल हैं—को उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उनके अधिकारों का सम्मान करना सड़कों पर सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। वाहन चालकों को यह समझना चाहिए कि सड़कें केवल वाहनों और उनके यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए हैं। बच्चों, बुज़ुर्गों, महिलाओं और अन्य लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए इन्हीं मार्गों का उपयोग करना पड़ता है।
अतः पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब तक क्षेत्र में पैदल चलने वालों के लिए पूर्णतः सुरक्षित ढांचा विकसित नहीं किया जाता, तब तक वाहन चालकों की मानसिकता में बदलाव लाना भी आवश्यक है, अन्यथा पैदल यात्री लगातार जोखिम में बने रहेंगे। सरकार, यातायात अधिकारियों और आम जनता को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे ताकि पैदल यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ उन्हें अधिकतम सुविधा भी प्रदान की जा सके। इससे जम्मू क्षेत्र सभी के लिए रहने योग्य और बेहतर स्थान बन सकेगा।