मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा एकीकृत खनन निगरानी प्रणाली की तैयारियों की समीक्षा
खनन कार्यों में मज़बूत प्रणाली लागू करने का निर्देश, समयबद्ध खनिज अन्वेषण की आवश्यकता पर बल दिया
श्रीनगर 15 अक्तूबर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नागरिक सचिवालय में खनन विभाग की एक व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें विभाग के आधुनिकीकरण प्रयासों, विनियामक ढाँचे और खनिज प्रबंधन तथा निगरानी में चल रहे सुधारों की प्रगति का आकलन किया गया।
बैठक में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरज गुप्ता, खनन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल कुमार, भूविज्ञान और खनन निदेशक, सभी उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान खनन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने विभाग के प्रदर्शन पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी और हाल के वर्षों में तकनीकी प्रगति, नियामक सुधार, अन्वेषण परियोजनाओं और वित्तीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
समीक्षा की प्रमुख विशेषता ‘एकीकृत खनन निगरानी प्रणाली’ की प्रस्तुति और लाइव डेमो थी, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान (भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लिकेशन्स एंड जियो-इनफॉर्मेटिक्स) के सहयोग से तैयार की गई एक डिजिटल पहल है। आईएमएसएस पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन ई-चालान और ई-मार्केट प्रणालियों के साथ एकी.त डैशबोर्ड के माध्यम से खनन गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करता है। इस नवाचार का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में खनिज परिचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामक अनुपालन को सु.ढ़ करना है।
उन्होंने बताया कि अब तक 243 से अधिक ट्रिगर फील्ड सत्यापन के लिए उत्पन्न किए गए हैं, जिनमें वाहन ट्रैकिंग, जीपीएस-आधारित निगरानी, पीओएस-लिंक्ड ई-चालान (जे एंड के बैंक के साथ एकी.त), और अवैध खनन को रोकने के लिए ऑन-द-स्पॉट प्रवर्तन जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।
इस पहल की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने डेवलपर्स को पीओएस फ़ंक्शंस को विस्तारित उपयोग हेतु अलग-अलग स्तरों पर सौंपने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग के मौजूदा पोर्टल को आईएमएसएस प्लेटफॉर्म के साथ एकी.त करने को भी कहा ताकि क्रियान्वयन सुचारू व परिणाम अधिक प्रभावी हो सकें।
उमर अब्दुल्ला ने सुझाव दिया कि इस एप्लिकेशन को नागरिकों की शिकायत दर्ज करने की सुविधा से जोड़ा जाए, ताकि लोग मोबाइल उपकरणों के माध्यम से उपग्रह चित्र या अन्य साक्ष्य अपलोड कर सकें, जिससे जनसहभागिता और शिकायत निवारण प्रणाली को सशक्त बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने विभाग को निर्देश दिया कि सक्रिय और निष्क्रिय खनिज विक्रेताओं या आपूर्तिकर्ताओं को वर्गी.त किया जाए और निदेशालय स्तर पर एक समर्पित निगरानी प्रकोष्ठ स्थापित किया जाए ताकि सतत डेटा ट्रैकिंग और वास्तविक समय पर्यवेक्षण संभव हो सके।
‘राज्यों के पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता’ 2025-26 के तहत चल रहे सुधारों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री को बताया गया कि विभाग ने संस्थागत क्षमता को सु.ढ़ करने और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु कई महत्वपूर्ण उपाय शुरू किए हैं। इनमें खनिज ब्लॉकों की नीलामी-आधारित आवंटन प्रणाली अपनाना, खदान समापन एवं पुनर्वास प्रावधानों का परिचय, और उन्नत सर्वेक्षण एवं मानचित्रण तंत्रों का कार्यान्वयन शामिल है। विभाग ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट ढांचे को भी सक्रिय किया है ताकि खनन राजस्व सीधे स्थानीय विकास और जनकल्याण पहलों में योगदान दे सके।
इसके अतिरिक्त, बताया गया कि रॉयल्टी शुल्क संरचना और दंड प्रावधानों की पुनर्समीक्षा की जा रही है ताकि उन्हें मौजूदा बाजार वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जा सके और अनुपालन सुधारा जा सके।
खनन विभाग ने खनिज परिवहन की निगरानी और रिसाव रोकने के लिए जीपीएस-आधारित वाहनों और पीओएस आधारित लेन-देन को अनिवार्य बना दिया है। न्यायालय के हालिया निर्देशों के अनुसार रॉयल्टी मंजूरी प्रमाणपत्र की अनिवार्यता से विधिक प्रवर्तन को भी मज़बूती मिली है, जिससे नियामक व्यवस्था और जिम्मेदार खनन प्रथाओं को सुनिश्चित किया गया है।
विभाग ने प्रमुख और गौण खनिज ब्लॉकों की स्थिति पर प्रस्तुति दी, जिसमें विभिन्न जिलों में नीलामी और खनन पट्टों की प्रगति बताई गई। मुख्यमंत्री ने ज़ोर दिया कि सभी अनुमति और एनओसी नीलामी से पहले ही प्राप्त की जानी चाहिए ताकि सफल आवंटियों एवं बोलीदाताओं को बाद में पर्यावरणीय या अन्य अनुमति प्राप्त करने में देरी व कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
अवैध खनन के मुद्दे पर बोलते हुए उमर अब्दुल्ला ने नीचे स्तर पर मिलीभगत समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि ऐसी गतिविधियाँ आंतरिक सहयोग के बिना संभव नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि अब हमारे पास तकनीकी उपकरण मौजूद हैं, इसलिए यदि अवैध खनन जैसी कोई गतिविधि होती है तो वह केवल निचले स्तर पर मिलीभगत के कारण हो सकती है। विभाग को चाहिए कि इन प्रणालियों का प्रभावी उपयोग करके इस संभावना को समाप्त करे। जितनी कम मिलीभगत होगी, अवैध खनन की संभावना उतनी ही कम होगी।
मुख्यमंत्री ने एमईसीएल और जीएसआई द्वारा वर्तमान में संचालित अन्वेषण परियोजनाओं की भी समीक्षा की, जिनमें विभिन्न जिलों में नीलम, लिथियम, लिग्नाइट और बायोजेनिक गैस भंडारों का अन्वेषण शामिल है। उन्हें ग्रेनाइट, ग्रेफाइट, जिप्सम, तांबा और अन्य धातुओं के अन्वेषण की प्रगति के बारे में भी जानकारी दी गई, जो विस्तृत भूवैज्ञानिक मानचित्रण, ड्रिलिंग और व्यवहार्यता आकलन द्वारा समर्थित हैं।