जेएनपीए: भारत की समुद्री शक्ति और जम्मू-कश्मीर के आयात-निर्यात व्यापार की जीवनरेखा

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लेखक: चंदर मोहन शर्मा

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPA) देश का प्रमुख कंटेनर बंदरगाह है, जिसने न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक व्यापार नेटवर्क से जोड़ा है, बल्कि खुद को भारत की समुद्री शक्ति का केंद्रबिंदु स्थापित किया है। 1989 में स्थापित और अब भारत का पहला लैंडलॉर्ड पोर्ट बन चुका जेएनपीए, परिचालन दक्षता, डिजिटल नवाचार, पर्यावरणीय स्थिरता और व्यापार सुविधा में नए मानक स्थापित कर रहा है।

हाल ही में आयोजित पीआईबी जम्मू-कश्मीर मीडिया टूर टू मुंबई के दौरान जम्मू और श्रीनगर से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जेएनपीए का दौरा किया। इस अवसर पर जेएनपीए के चेयरमैन उन्मेष शरद वाघ ने कहा कि “जेएनपीए केवल एक बंदरगाह नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक कनेक्टिविटी की धड़कन है।”
जम्मू-कश्मीर के लिए यह जुड़ाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है — यह आर्थिक जीवनरेखा है। केंद्र शासित प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः हस्तशिल्प, सूखे मेवे और बागवानी उत्पादों के निर्यात पर निर्भर है, जिनकी समय पर और किफायती ढंग से आपूर्ति के लिए प्रभावी लॉजिस्टिक्स आवश्यक हैं।

वर्तमान में जेएनपीए के पास पाँच प्रमुख कंटेनर टर्मिनल हैं — बीएमसीटी  एनएसआईसीटी और एनएसआईजीटी जीटीआई  तथा एनएसएफटी  — जो हर वर्ष लगभग 10.1 मिलियन TEUs और 155 मिलियन टन माल का प्रबंधन करते हैं। बीएमसीटी फेज-II और अतिरिक्त तरल टर्मिनलों जैसी आधुनिक परियोजनाएँ भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए तैयार की जा रही हैं।

डिजिटल नवाचारों जैसे RFID और OCR आधारित गेट ऑटोमेशनसागर सेतु डिजिटल प्लेटफॉर्मई-डिलीवरी ऑर्डर और ERP इंटीग्रेटेड मोबाइल ऐप्स ने संचालन को सरल बनाया है। इन सुधारों की बदौलत जेएनपीए ने विश्व बैंक कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स 2024 में 96वें स्थान से उछलकर 23वां स्थान प्राप्त किया — जो इसकी दक्षता और पारदर्शिता का प्रमाण है।

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी जेएनपीए अग्रणी है। पोर्ट के स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में 1.1 लाख से अधिक पेड़ मियावाकी पद्धति से लगाए गए हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक और CNG वाहनों के उपयोग से प्रतिवर्ष 200 टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है, जबकि बैटरी-स्वैपिंग ट्रक और शोर पावर सप्लाई सिस्टम से 500 टन अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन में कमी हो रही है। वर्ष 2029 तक 632 इलेक्ट्रिक ट्रक तैनात करने की योजना भी तैयार की गई है।

277 हेक्टेयर में फैला जेएनपीए का स्पेशल इकोनॉमिक जोन पोर्ट-आधारित औद्योगिकीकरण का केंद्र बन चुका है। इसमें 54 से अधिक प्लॉट विभिन्न उद्योगों — वेयरहाउसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और फूड प्रोसेसिंग — को आवंटित किए जा चुके हैं। इससे न केवल निर्यात को प्रोत्साहन मिल रहा है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं, जो जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों के लिए आर्थिक जुड़ाव का नया मार्ग खोलता है।

सड़क और रेल संपर्क के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है। NH-348, SH-54, अमरा मार्ग, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और इंदौर-मनमाड रेल लाइन जैसी परियोजनाएँ उत्तर भारत, विशेषकर जम्मू-कश्मीर के लिए तेज़ और सस्ते माल परिवहन को संभव बना रही हैं।

जम्मू-कश्मीर के लिए जेएनपीए का यह विकास प्रत्यक्ष लाभ देता है — स्थानीय उत्पादों का तेज़ निर्यातअंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच, और क्षेत्रीय उद्योगों का राष्ट्रीय व वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण। इस बंदरगाह ने वास्तव में स्थल-रुद्ध प्रदेशों को विश्व से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त किया है।

जेएनपीए कौशल विकास और वैश्विक सहयोग पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। JNPA-एंटवर्प पोर्ट ट्रेनिंग एंड कंसल्टेंसी फाउंडेशन के माध्यम से अब तक भारत और अन्य देशों के 1000 से अधिक पोर्ट अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। यह पहल जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों के हितधारकों को भी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से जोड़ने में मदद कर सकती है।

पीआईबी जम्मू-कश्मीर मीडिया टूर ने यह स्पष्ट कर दिया कि जेएनपीए जैसे रणनीतिक बंदरगाह केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं हैं — वे क्षेत्रों को जोड़ने, अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त करने और विकास को गति देने का माध्यम हैं।
जम्मू-कश्मीर के लिए जेएनपीए केवल एक दूरस्थ बंदरगाह नहीं, बल्कि वह आर्थिक जीवनरेखा है जो प्रदेश के उत्पादों, कौशल और संभावनाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक पहुँचाती है — और समावेशी भारत के विकास का सशक्त प्रतीक बनती है।

📰 — चंदर मोहन शर्मा, विशेष संवाददाता

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