उपराज्यपाल ने जम्मू विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया
जम्मू 08 सितम्बर: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में मुख्य वक्तव्य दिया।
अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने जम्मू विश्वविद्यालय से आह्वान किया कि वह संरक्षण हेतु नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करे, शिक्षा में सस्टेनेबिलिटी को एकीकृत करे तथा छात्रों को उभरती चुनौतियों का सामना करने और विकसित भारत निर्माण में योगदान देने के लिए तैयार करे।
उपराज्यपाल ने कहा “हमारे युवाओं को ऐसा विकास आगे बढ़ाना चाहिए जो समाज की आवश्यकताओं को तो पूरा करे परंतु पारिस्थितिकी तंत्र से समझौता न करे। हमें आधुनिक नवाचारों के माध्यम से संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना होगा। भविष्य की पीढ़ियों के लिए धरती को बेहतर बनाने हेतु बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।”
उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे युवाओं को इस जिम्मेदारी में मार्गदर्शन प्रदान करें कि विकास और प्रकृति में संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि धरती मां की रक्षा करना और समाज के सभी स्तरों पर पर्यावरणीय जागरूकता का प्रसार करना हमारी साझा जिम्मेदारी है।
उपराज्यपाल ने जम्मू विश्वविद्यालय के उपकुलपति, शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और छात्रों को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए कहा कि उन्हें नये एवं चुनौतीपूर्ण लक्ष्यों को तय कर उन्हें उत्साह एवं नये संकल्प के साथ प्राप्त करने के लिए कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा “आज का अवसर आत्मचिंतन, आत्मविश्लेषण और आत्ममंथन का भी अवसर है। मुझे गर्व है कि हमारे विश्वविद्यालयों ने हाल ही में जारी एनआईआरएफ-2025 रैंकिंग्स में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं। ये रैंकिंग्स एक ओर जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति और परिवर्तन का प्रतीक हैं, वहीं दूसरी ओर हमें आत्ममंथन कर नए लक्ष्य तय करने की प्रेरणा देती हैं।”
उन्होंने कहा कि कैंपस में बदलाव की प्रक्रिया सतत बनी रहनी चाहिए ताकि छात्र नवीनता सीखने, चुनौतियों का सामना करने और भविष्य के लिए तत्पर बने रहें।
उपराज्यपाल ने कहा कि कक्षा को एक “थिंक रूम” में बदला जाना चाहिए जहाँ जिज्ञासा और सृजनशीलता का माहौल हो। अनुभव-आधारित, अंतःविषयक, जीवन-कौशल एवं प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि युवा अनिश्चित भविष्य के लिए तैयार हो सकें।
उन्होंने जम्मू विश्वविद्यालय से आह्वान किया कि वह लघु अवधि के व्यावसायिक कार्यक्रम प्रारंभ करे ताकि जलवायु चुनौतियों से निपटा जा सके तथा बाढ़ और भूस्खलन पर अनुसंधान कार्य प्रारंभ किया जाए।
प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए उपराज्यपाल ने कहा “हाल ही में जम्मू-कश्मीर में बड़ी तबाही हुई, जिसमें बुनियादी ढांचे की क्षति और जनहानि हुई। भारत सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि सामान्य जीवन पुनः पटरी पर लौटे और प्रभावित लोगों का पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। सड़क संपर्क बहाल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि छात्र दलों को विभिन्न क्षेत्रों में भेजें तथा स्वयंसेवकों की एक टीम तैयार करें, जो प्रभावित परिवारों की राहत और पुनर्वास कार्यों में जिला प्रशासन का सहयोग करे।”
इस अवसर पर उपराज्यपाल ने जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों को सम्मानित किया और विश्वविद्यालय की प्रगति में उनके सार्थक योगदान का आह्वान किया। एनएसएस और एनसीसी स्वयंसेवकों सहित निवृत्त शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नॉर्दर्न रीजन ट्रांसमिशन सिस्टम प्प्) ने अपनी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी पहल के अंतर्गत जम्मू विश्वविद्यालय को सार्वजनिक संबोधन प्रणाली और स्ट्रीट लाइट्स सौंपे।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति ताशी रबस्तान, उच्च न्यायालय जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख (पूर्व मुख्य न्यायाधीश), उपकुलपति जम्मू विश्वविद्यालय प्रो. उमेश राय, कार्यकारी निदेशक पावरग्रिड तरुण बजाज, डीन रिसर्च स्टडीज डॉ. नीलू रोहत्रा, डीन अकादमिक अफेयर्स प्रो. जे.पी. सिंह, रजिस्ट्रार डॉ. नीरज शर्मा, विशिष्ट पूर्व छात्र, संकाय सदस्य, कर्मचारी और छात्र उपस्थित थे।