एनसी आर्टिकल 370 और 35ए को खत्म करने की कोशिश कर रही है: सज्जाद लोन

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श्रीनगर, 17 जुलाई (हि.स.)।

 

पीपल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक संघर्ष का फोकस सिर्फ़ राज्य का दर्जा बहाल करने पर नहीं बल्कि 5 अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति को बहाल करने पर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) अपने अभियान को सिर्फ़ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित रखकर आर्टिकल 370 और 35ए को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

 

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लोन ने कहा कि आर्टिकल 370, आर्टिकल 35ए और राज्य का दर्जा मिलकर वह संवैधानिक ढांचा बनाते थे जो 5 अगस्त 2019 से पहले मौजूद था और इनमें आर्टिकल 370 सबसे महत्वपूर्ण था। उन्होंने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के लिए 2019 से पहले की स्थिति की बहाली चाहते हैं न कि सिर्फ़ राज्य का दर्जा। मुद्दा राजनीतिक सशक्तिकरण का है न कि सिर्फ़ राज्य का दर्जा बहाल करने का।

 

एनसी द्वारा जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए लोन ने आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक नैरेटिव को आर्टिकल 370 और 35ए से दूर ले जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनसी ने जिन मुद्दों पर वोट मांगे थे वे आर्टिकल 370 और 35ए की बहाली थे। आज सिर्फ़ राज्य का दर्जा बहाल करने की बात की जा रही है। मेरा मानना ​​है कि यह उन मांगों को खत्म करने की कोशिश है।

 

लोन ने कहा कि अगर सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर गंभीर है तो उसे इस मुद्दे को सड़कों पर ले जाने से पहले विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए, प्रस्ताव पारित करना चाहिए और प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और विपक्ष के नेता से मिलने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा अभी भी लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। सबसे पहले संवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। लोन ने प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन के समय पर भी सवाल उठाए और कहा कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि अगर उन बैठकों में राज्य का दर्जा बहाल करने का कोई आश्वासन नहीं मिला तो लोगों को बताया जाना चाहिए कि क्या जवाब मिला। अपनी पार्टी का रुख़ दोहराते हुए लोन ने कहा कि पीपल्स कॉन्फ्रेंस राज्य का दर्जा बहाल करने का समर्थन करती है लेकिन यह समर्थन तभी होगा जब जम्मू-कश्मीर की 2019 से पहले वाली संवैधानिक स्थिति जिसमें अनुच्छेद 370 और 35A शामिल हैं को भी बहाल किया जाए।

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