मुख्य सचिव ने जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रगति की समीक्षा की

**किसानों के अधिकतम कवरेज और दावों के समयबद्ध निपटारे पर दिया जोर**

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**श्रीनगर, 17 जून:** मुख्य सचिव **अटल डुल्लू** ने आज राज्य स्तरीय फसल बीमा समन्वय समिति (SLCCCI) की बैठक की अध्यक्षता कर जम्मू-कश्मीर में **प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)** तथा अन्य फसल बीमा योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि उत्पादन विभाग), जम्मू-कश्मीर बैंक के प्रबंध निदेशक, कृषि निदेशक कश्मीर एवं जम्मू, यूटीएलबीसी के संयोजक तथा संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप **किसान ऋण (KRIN) पोर्टल** पर दर्ज सभी पात्र किसानों को योजना के दायरे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने संबंधित विभागों, बैंकों और अन्य हितधारकों को आपसी समन्वय से कार्य कर पात्र किसानों का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अटल डुल्लू ने कहा कि चलाया जा रहा **‘खेत बचाओ अभियान’** किसानों में जागरूकता फैलाने और उन्हें फसल बीमा का लाभ लेने के लिए प्रेरित करने का प्रभावी मंच बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह अभियान किसानों को बीमा के माध्यम से जोखिम प्रबंधन के महत्व से अवगत कराने और उन्हें इस किसान हितैषी योजना से जोड़ने का बेहतर अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बैंकों को भी अपने **किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)** धारकों तक पहुंच बनाकर उन्हें पीएमएफबीवाई में शामिल करने के निर्देश दिए।

जमीनी स्तर पर बेहतर समन्वय और कार्यान्वयन संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए मुख्य सचिव ने कृषि उत्पादन विभाग को प्रत्येक जिले के लिए **नोडल अधिकारी** नियुक्त करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर बाधाओं की पहचान एवं समाधान करेंगे तथा पात्र किसानों के निर्बाध पंजीकरण और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।

प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम के कारण होने वाले फसल नुकसान से किसानों की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सभी हितधारकों को मिलकर बीमा कवरेज बढ़ाने और किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए कार्य करना चाहिए।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, कृषि उत्पादन विभाग **डॉ. आशीष चंद्र वर्मा** ने योजना के आरंभ से अब तक के प्रदर्शन, खरीफ 2025 के दावों की स्थिति, रबी 2025-26 के दौरान कवरेज, ऋण लेने वाले किसानों के कवरेज तथा **पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS)** के कार्यान्वयन पर विस्तृत प्रस्तुति दी।

उन्होंने कहा कि फसल बीमा के लाभों के बारे में ग्रामीण स्तर पर व्यापक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें। उन्होंने बताया कि मीडिया के अलावा ‘खेत बचाओ अभियान’ तथा अन्य सरकारी जनसंपर्क कार्यक्रमों का उपयोग भी किसानों को योजना की जानकारी देने और उन्हें लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने में किया जाएगा।

कृषि निदेशक, कश्मीर ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में पीएमएफबीवाई लागू होने के बाद से अब तक **12.89 लाख से अधिक किसानों** को योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है, जबकि **6.85 लाख से अधिक किसानों** को दावा भुगतान का लाभ मिला है।

उन्होंने बताया कि रबी 2025 तक योजना के तहत **4.05 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र** का बीमा किया गया है। कुल **463.37 करोड़ रुपये** के प्रीमियम संग्रह के मुकाबले किसानों के पक्ष में **220.35 करोड़ रुपये** के दावों का निपटारा किया गया है, जिससे फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को महत्वपूर्ण आर्थिक सहायता मिली है।

खरीफ 2025 के दावों की स्थिति की समीक्षा के दौरान बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में **1.27 लाख किसानों** से संबंधित **53.58 करोड़ रुपये** के दावे प्रस्तुत किए गए हैं। खरीफ 2025 के दौरान लगभग **2.01 लाख किसानों** का पंजीकरण हुआ, जिनके तहत **75 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र** बीमित किया गया।

बैठक में रबी 2025-26 के दौरान स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद हुए नुकसान से संबंधित दावों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि किसानों से **2,100 से अधिक नुकसान सूचनाएं** प्राप्त हुई हैं, जिनकी दावा राशि **5.52 करोड़ रुपये** से अधिक है। कृषि उत्पादन विभाग संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर पात्र दावों के शीघ्र निपटारे के लिए कार्य कर रहा है।

रबी 2025-26 के दौरान हासिल किए गए कवरेज की समीक्षा में मुख्य सचिव को बताया गया कि पिछले सीजन की तुलना में जम्मू-कश्मीर में किसान पंजीकरण और बीमित क्षेत्र दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। किसान पंजीकरण की वृद्धि दर के मामले में जम्मू-कश्मीर देश के अग्रणी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शामिल रहा है।

बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड धारकों के कवरेज की स्थिति पर भी चर्चा हुई। इसमें पाया गया कि पर्याप्त प्रगति के बावजूद पात्र ऋणधारी किसानों के शत-प्रतिशत कवरेज की दिशा में अभी और प्रयासों की आवश्यकता है।

इसके अलावा, **पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS)** के कार्यान्वयन पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। योजना की प्रीमियम संरचना, वित्तीय प्रभावों और निविदा प्रक्रिया से संबंधित प्रस्तुतियां दी गईं।

बैठक में भारत सरकार द्वारा पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस की संचालन संबंधी संशोधित दिशानिर्देशों तथा खरीफ 2026 से शुरू होने वाले राष्ट्रीय निविदा चक्र के संबंध में जारी परामर्शों पर भी चर्चा की गई।

किसानों के हितों की रक्षा और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने कृषि उत्पादन विभाग को निर्देश दिए कि वह भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और उभरती नीतिगत आवश्यकताओं के अनुरूप फसल बीमा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करे।

उन्होंने दोहराया कि सरकार मौसम संबंधी और अन्य उत्पादन जोखिमों से किसानों की सुरक्षा के लिए फसल बीमा कवरेज को मजबूत करने तथा कृषि क्षेत्र की लचीलापन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि जम्मू-कश्मीर के किसानों की आय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

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