जम्मू-कश्मीर के नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने राज्य का दर्जा बहाली को लेकर एनसी के प्रस्तावित प्रदर्शन को बताया ‘दिखावा’

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**श्रीनगर, 18 जून:** जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Sunil Sharma ने बुधवार को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन को “महज दिखावा” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि Jammu & Kashmir National Conference की सरकार अपनी “शून्य शासन व्यवस्था” से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुनील शर्मा ने कहा, “यह केवल एक दिखावा है।”

गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देने की घोषणा की है, ताकि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे की याद दिलाई जा सके।

शर्मा ने कहा कि लोग बिजली की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई समीक्षा बैठक होते नहीं देखी। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं हो रहा है और सरकार इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।

उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार चरम पर है और इसके बिना कोई काम करवाना मुश्किल हो गया है। इन छह मंत्रियों वाली सरकार ने केवल भ्रष्टाचार का माहौल बनाया है। जमीनी स्तर पर न तो शासन दिखाई देता है और न ही कोई प्रदर्शन। यह पूरी तरह से शून्य शासन और शून्य प्रदर्शन वाली सरकार है।”

भाजपा सांसद ने कहा कि अन्य राज्यों में मुख्यमंत्री आम जनता से मिलते हैं और जनसंपर्क कार्यक्रम चलाते हैं, जबकि यहां के मुख्यमंत्री Omar Abdullah केवल अपनी पार्टी के विधायकों से ही मिलते हैं।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री को जनता से मिलना चाहिए, समीक्षा बैठकें करनी चाहिए, अधिकारियों से जानकारी लेनी चाहिए और जमीनी स्तर पर लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए। अपनी नाकामी और कमजोर प्रदर्शन से लोगों का ध्यान हटाने के लिए उन्होंने जंतर-मंतर कार्यक्रम का सहारा लिया है, और मुझे इस पर गंभीर आपत्ति है।”

इससे पहले केंद्र में Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में सुनील शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की तस्वीर बदल दी है और यहां से हिंसा तथा अराजकता का माहौल समाप्त किया है।

उन्होंने कहा, “2014 से पहले पत्थरबाजी की घटनाएं होती थीं और भय का वातावरण बना रहता था। आज स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठान बिना किसी डर के सामान्य रूप से चल रहे हैं। वर्ष के 365 दिनों में पहले 150 से 200 दिन हड़तालें रहती थीं, लेकिन अब ऐसी स्थिति नहीं है।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में शांति, सामान्य स्थिति और विकास का माहौल है, जो केंद्र सरकार की नीतियों का परिणाम है।

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