एल-जी विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख में मौसमी जल संकट से निपटने के लिए ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ शुरू किया
### परियोजना के तहत लेह में सिंधु नदी पर देश का पहला रॉक चेक डैम स्थापित ### रॉक चेक डैम से सिंचाई को मिलेगा बढ़ावा, ऊंचाई वाले गांवों में जल सुरक्षा होगी मजबूत
**लेह, 27 मई:** लद्दाख में दीर्घकालिक जल और कृषि स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से देश के पहले अभिनव रॉक चेक डैम का आज उपराज्यपाल श्री विनय कुमार सक्सेना ने लेह के उप्शी क्षेत्र में उद्घाटन किया।
सिंधु नदी पर लेह से 44 किलोमीटर दूर और समुद्र तल से 11,400 फीट की ऊंचाई पर बने इस रॉक चेक डैम की परिकल्पना उपराज्यपाल श्री सक्सेना ने लद्दाख के जल संकट के लिए पर्यावरण अनुकूल, किफायती और स्थायी समाधान के रूप में की है।
इस रॉक चेक डैम का निर्माण नदी तल और आसपास के क्षेत्रों से प्राप्त बड़े पत्थरों का उपयोग कर किया गया है, ताकि नदी के पानी को रोका जा सके। उपराज्यपाल ने इस परियोजना का नाम “सिंधु जल समृद्धि अभियान (एसजेएसए)” रखा है। इस अभियान का उद्देश्य नदी के विशेष स्थानों, खासकर संकरे हिस्सों में रॉक चेक डैम बनाकर जल स्तर बढ़ाना है, जहां नदी के पानी का उपयोग करना अपेक्षाकृत आसान और प्रभावी हो।
चेक डैम के स्थान का चयन गांववासियों और स्थानीय लोगों से परामर्श के बाद किया जाता है। उपराज्यपाल ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को एक माह के भीतर प्रायोगिक आधार पर ऐसे तीन और चेक डैम बनाने के निर्देश दिए हैं।
लद्दाख के कई हिस्सों में सिंधु नदी का जल स्तर बहुत कम हो जाता है, जिससे सामान्य मोटर और पंप नदी से पानी उठाकर ऊंचाई वाले खेतों तक पहुंचाने में विफल रहते हैं। ऐसे में ये रॉक चेक डैम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनसे बड़े जल भंडारण क्षेत्र का निर्माण होगा, जिसमें बुवाई के चरम मौसम के दौरान पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा।
चूंकि निर्माण में उपयोग किए गए पत्थर सीधे नदी तल से लिए गए हैं, इसलिए इसमें सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इससे यह परियोजना पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल बन गई है।
उपराज्यपाल ने कहा कि सिंधु जल समृद्धि अभियान सिंचाई सुविधाओं में सुधार, जल सुरक्षा को मजबूत करने और दूरदराज गांवों में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा, “प्रोजेक्ट हिम सरोवर की सफलता के बाद यह लद्दाख में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक और अभिनव एवं पर्यावरण अनुकूल पहल है। रॉक चेक डैम को लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए टिकाऊ जल और कृषि सुरक्षा के मॉडल के रूप में तैयार किया गया है। इस पहल को गांववासियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है।”
सीमेंट-कंक्रीट से बने पारंपरिक चेक डैमों के विपरीत, रॉक चेक डैम नदी चैनल पर बनाया गया एक अर्ध-स्थायी अवरोध है। यह पानी के प्रवाह की गति को कम करता है और पीछे बड़े जल भंडारण क्षेत्र का निर्माण करता है, जबकि अतिरिक्त पानी को बहने देता है। इससे झरने जैसा प्रभाव पैदा होता है और नदी में ऑक्सीकरण बढ़ता है।
उप्शी में बना यह रॉक चेक डैम लगभग 200 फीट लंबा है। इसकी स्थिरता के लिए नदी तल पर आधार चौड़ाई 30 फीट रखी गई है, जबकि ऊपरी सतह 15 फीट चौड़ी और नदी तल से 5 फीट ऊंची है। इसे पानी के उच्च दबाव को सहन करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
वर्तमान में सिंधु नदी में पानी का प्रवाह लगभग 25 क्यूसेक (प्रति सेकंड घन फीट) है, जो जुलाई-अगस्त में बढ़कर लगभग 200 क्यूसेक तक पहुंच जाता है। रॉक वीयर का डिजाइन इस प्रकार तैयार किया गया है कि जल प्रवाह बढ़ने पर भी यह बह न सके।
विशेष बात यह है कि इस चेक डैम का निर्माण मात्र सात दिनों में 12 से 18 मई 2026 के बीच पूरा किया गया। इस दौरान उपराज्यपाल ने परियोजना की प्रगति का निरीक्षण करने के लिए तीन बार स्थल का दौरा किया।
करीब 180 मीट्रिक टन पत्थरों, जिनका वजन 500 किलोग्राम से लेकर 10 मीट्रिक टन तक है, को सावधानीपूर्वक आपस में जोड़कर नदी तल में यह चेक डैम तैयार किया गया है।
इस रॉक चेक डैम से लगभग 1500 फीट (500 मीटर) तक विशाल जल भंडारण क्षेत्र बना है, जिसमें करीब 4 करोड़ लीटर पानी संग्रहित हो रहा है। नदी के किनारों पर पानी की गहराई 4 से 5 फीट है, जबकि बीच में यह 10 फीट तक पहुंच रही है।