टूटती सड़कें, टूटते वादे

0

 

 

जम्मू के लोगों के लिए सड़कों पर सफर अब सामान्य दिनचर्या नहीं, बल्कि रोज़ाना की एक मुश्किल बन चुका है। जम्मू शहर के बीचों-बीच से लेकर संभाग के दूरदराज इलाकों तक टूटी सड़कें, गड्ढे, क्षतिग्रस्त गलियां और अधूरे निर्माण कार्य प्रशासनिक लापरवाही के प्रतीक बन चुके हैं। हर साल सरकारें विकास और बुनियादी ढांचे को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन वादों की खोखली सच्चाई को उजागर करती रहती है।

 

जम्मू शहर की सड़कों की हालत खुद बेहद चिंताजनक है। गांधी नगर, तालाब तिल्लो, जानीपुर, बख्शी नगर और कई व्यस्त बाजारों की मुख्य सड़कें गहरे गड्ढों से भरी पड़ी हैं। बारिश के दौरान ये सड़कें कीचड़ भरे तालाबों में बदल जाती हैं, जिससे पैदल यात्रियों, वाहन चालकों और स्कूल जाने वाले बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों की स्थिति तो और भी बदतर है, जहां टूटी सड़कों ने गांवों को लगभग अलग-थलग कर दिया है और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

 

विडंबना यह है कि जम्मू में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, शहरी विकास और सड़क विस्तार को लेकर बड़े स्तर पर घोषणाएं की गईं। सड़क मरम्मत और ब्लैकटॉपिंग के लिए करोड़ों रुपये मंजूर होने के दावे किए गए, लेकिन यात्री आज भी परेशान हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यह पैसा खर्च कहां हो रहा है? नई बनी सड़कें कुछ ही महीनों में दोबारा क्यों टूट जाती हैं? इन सवालों का जवाब प्रशासन को गंभीरता से देना चाहिए।

 

घटिया निर्माण कार्य और जवाबदेही की कमी इस संकट की सबसे बड़ी वजह हैं। ठेकेदार निम्न गुणवत्ता वाले काम के बावजूद कार्रवाई से बच जाते हैं, जबकि अधिकारी एक-दूसरे विभागों पर जिम्मेदारी डालकर अपनी जवाबदेही से बच निकलते हैं। ड्रेनेज, पानी की पाइलाइन या केबल बिछाने के लिए बार-बार सड़कें खोदी जाती हैं, लेकिन बाद में उनकी सही तरीके से मरम्मत नहीं की जाती। इसका परिणाम ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था और बढ़ते सड़क हादसों के रूप में सामने आता है।

 

इसका सबसे बड़ा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गहरे गड्ढे लगातार खतरा बने हुए हैं, जबकि एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को टूटी सड़कों के कारण कीमती समय गंवाना पड़ता है। वाहन मालिकों को सस्पेंशन और टायर खराब होने के कारण भारी खर्च उठाना पड़ रहा है। नागरिकों की जिंदगी आसान बनाने के बजाय जम्मू की सड़कें उनकी रोजमर्रा की परेशानी बढ़ा रही हैं।

 

सबसे निराशाजनक बात यह है कि दीर्घकालिक योजना का पूरी तरह अभाव दिखाई देता है। प्रशासन केवल वीआईपी दौरों या सोशल मीडिया पर लोगों के आक्रोश के बाद ही सक्रिय नजर आता है। अस्थायी पैचवर्क को स्थायी समाधान की तरह पेश किया जाता है, जबकि असली समस्या जस की तस बनी रहती है।

 

जम्मू इससे बेहतर का हकदार है। जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी और प्रमुख तीर्थ मार्ग होने के नाते शहर को मजबूत और टिकाऊ सड़कों की जरूरत है, न कि केवल दिखावटी मरम्मत की। विकास केवल भाषणों और विज्ञापनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वह जमीन पर दिखाई भी देना चाहिए। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करते हुए सड़क परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए और खराब कार्य के लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए। अन्यथा जम्मू की सड़कें विकास की तस्वीर नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बनी रहेंगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.