सरकार को सार्थक हस्तक्षेप करना चाहिए**
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए केंद्र सरकार को इस मामले का संज्ञान लेते हुए सार्थक हस्तक्षेप करना चाहिए। सरकार को ऐसा समाधान तलाशना चाहिए जिससे विश्वप्रसिद्ध शिक्षाविद्, नवोन्मेषक और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक का आंदोलन समाप्त हो सके। वांगचुक ने अपने कार्यों के माध्यम से लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उल्लेखनीय है कि उनकी स्वास्थ्य निगरानी कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 19 दिनों के दौरान उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक उपवास के कारण उनकी स्थिति अब गंभीर हो गई है और इसका असर उनके आंतरिक अंगों पर भी पड़ सकता है। स्थिति को और गंभीर इस बात ने बना दिया है कि राजनीतिक नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों की अपीलों के बावजूद वांगचुक अपना अनशन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया मिले बिना अनशन तोड़ना गलत संदेश देगा।
वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील करने वालों में डॉ. करण सिंह भी शामिल हैं। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि देश ऐसे प्रतिभाशाली नवोन्मेषक को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता, जिसने वर्षों से लद्दाख के लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके अलावा संगीतकार विशाल ददलानी, अभिनेता सयाजी शिंदे और लेखिका शोभा डे ने भी सरकार से वांगचुक के साथ संवाद शुरू करने की अपील की है और उनकी बिगड़ती सेहत पर चिंता व्यक्त की है। इस बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वांगचुक के स्वास्थ्य की प्रतिदिन निगरानी की जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। न्यायालय ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन अमूल्य है।
इसके जवाब में केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें वांगचुक के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पर कोई आपत्ति नहीं है। यह कदम सराहनीय है, लेकिन इससे भी अधिक आवश्यक यह है कि केंद्र सरकार वांगचुक के साथ सार्थक संवाद शुरू करे, उन्हें अनशन समाप्त करने के लिए राजी करे और बातचीत के माध्यम से देश में प्रश्नपत्र लीक (पेपर लीक) जैसे गंभीर मुद्दे पर विचार-विमर्श करे।
उल्लेखनीय है कि सीजेपी (cjp) जंतर-मंतर पर कथित नीट (neet) परीक्षा अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहा है। संगठन ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को संसद मार्च का भी आह्वान किया है।
सरकार को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि सोनम वांगचुक का जीवन अत्यंत मूल्यवान है। इसलिए सरकार को उनकी जान बचाने और इस गतिरोध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए सक्रिय एवं सकारात्मक पहल करनी चाहिए।