सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती जरूरी**

0

 

जम्मू-कश्मीर में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण लंबे समय से प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। समय-समय पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए जाने के बावजूद यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।

यह समझना आवश्यक है कि सरकारी भूमि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होती, बल्कि वह आम जनता के हित और विकास कार्यों के लिए सुरक्षित रखी जाती है। ऐसी भूमि पर अवैध कब्जा करने वाले लोग न केवल आम नागरिकों के अधिकारों का हनन करते हैं, बल्कि कानून और स्थापित व्यवस्थाओं की भी खुली अवहेलना करते हैं।

जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण को देखते हुए अब समय आ गया है कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि स्पष्ट संदेश जाए कि सरकार अपनी संपत्ति पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगी।

इसी संदर्भ में सांबा जिला प्रशासन द्वारा पुलिस के सहयोग से बेला मनोहर क्षेत्र में चलाया गया अतिक्रमण विरोधी अभियान एक सराहनीय और प्रभावी कदम है। यह कार्रवाई न केवल दोषी को सबक सिखाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि दूसरों को भी ऐसे अवैध कार्यों से दूर रहने की चेतावनी देती है।

जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में आरोपी व्यक्ति द्वारा सरकारी भूमि पर बनाए गए अवैध निर्माण को सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि प्रशासन सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और कानून के शासन को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस प्रकार की दृढ़ कार्रवाई अन्य लोगों के लिए भी प्रभावी निवारक सिद्ध हो सकती है। जब लोगों को यह विश्वास होगा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का परिणाम कठोर कानूनी कार्रवाई के रूप में सामने आएगा, तो ऐसी प्रवृत्तियों में निश्चित रूप से कमी आएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कानून का पालन पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और बिना किसी भेदभाव के हो, ताकि सामाजिक हैसियत, प्रभाव या पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, हर दोषी के खिलाफ समान कार्रवाई की जाए।

सरकारी भूमि पर अतिक्रमण जम्मू-कश्मीर की पुरानी और जटिल समस्या है। इसलिए इसे स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए निरंतर और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।

यह भी जरूरी है कि ऐसे अभियान केवल एक बार की कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित निगरानी, अवैध कब्जों की समय पर पहचान तथा राजस्व विभाग और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से लगातार जारी रहें। केंद्र शासित प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के अभियान चलाए जाने चाहिए, क्योंकि यह समस्या व्यापक है और इसके समाधान के लिए सामूहिक एवं निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।

इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए, ताकि वे अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें और व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाया जा सके। भ्रष्टाचार भी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बढ़ने के प्रमुख कारणों में से एक है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.