मुख्य सचिव ने भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण की प्रगति की समीक्षा की
श्रीनगर, 8 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने आज जम्मू-कश्मीर में चल रही भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि यद्यपि यह प्रक्रिया जटिल और कठिन है, फिर भी यह केंद्र शासित प्रदेश में पारदर्शिता, सटीक भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड, कुशल नियोजन और बेहतर कृषि पद्धतियों को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
बैठक में राजस्व सचिव कुमार राजीव रंजन; सर्वेक्षण एवं भूमि अभिलेख निदेशक; पंजीकरण महानिरीक्षक; राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के सीईओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जबकि सभी उपायुक्तों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया।
मुख्य सचिव ने डिजिटलीकरण प्रक्रिया को अत्यंत सटीकता के साथ पूरा करने के महत्व पर ज़ोर दिया और कहा कि भूमि संबंधी विवादों का एक बड़ा हिस्सा भूमि अभिलेखों में विसंगतियों के कारण उत्पन्न होता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रगति की नियमित निगरानी और मूल्यांकन सुनिश्चित करने तथा अगले छह से सात महीनों के भीतर आधुनिकीकरण प्रक्रिया को हर दृष्टि से पूरा करने के निर्देश दिए।
वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा करते हुए, डुल्लू ने निदेशक, भूमि अभिलेख को निर्देश दिया कि वे सभी उपायुक्तों को कुछ गाँवों में लुप्त मुसावियों (कैडस्ट्रल मानचित्रों) के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करने के लिए जिलों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाए, ताकि शेष गाँवों के लिए आगे की कार्यवाही उसके बाद निर्धारित की जा सके।
मुख्य सचिव ने भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के प्रमुख घटकों, जैसे जमाबंदियों का डिजिटलीकरण, कैडस्ट्रल मानचित्रों का भू-संदर्भीकरण, सर्वेक्षण संख्याओं का उप-विभाजन, पंजीकरणों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, अभिलेख कक्षों का आधुनिकीकरण, राजस्व न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण, शहरी स्थानीय निकायों में नक्शा का कार्यान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति कार्ड वितरण हेतु स्वामित्व योजना, के अंतर्गत प्रगति की भी समीक्षा की।