मुख्य सचिव ने बिजली क्षेत्र में सुधारों की रफ्तार और जवाबदेही पर दिया जोर
जम्मू, 25 नवंबर: मुख्य सचिव अतल दुल्लो ने आज जम्मू-कश्मीर के विद्युत विकास विभाग (पीडीडी) में चल रहे सुधारात्मक कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में संचालन दक्षता बढ़ाने, अवसंरचना को सुदृढ़ करने और “रीवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस)” के तहत बिजली हानियों में उल्लेखनीय कमी लाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
समीक्षा बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव पीडीडी, जेपीडीसीएल/केपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक, निगमों के मुख्य अभियंता, एनटीपीसी व पीईएसएल के प्रतिनिधि सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मुख्य सचिव ने कहा कि हानि-न्यूनकरण से जुड़े सभी कार्यों को भारत सरकार द्वारा निर्धारित आरडीएसएस की समय-सीमा (सनसेट पीरियड) के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। उन्होंने एलटी केबल प्रतिस्थापन, वितरण प्रणाली का उन्नयन, एचटी लाइन कैबलिंग, एचटी कंडक्टर बदलने, फीडर पृथक्करण और बिजली पोल की स्थापना सहित सभी घटकों के लिए दैनिक और साप्ताहिक लक्ष्य तय करने के निर्देश दिए।
उन्होंने फीडर-वार बिलिंग और राजस्व संग्रह दक्षता बढ़ाने पर जोर देते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा। मुख्य सचिव ने जम्मू और कश्मीर के संभागीय आयुक्तों से मासिक समीक्षा करने और क्षेत्रीय स्तर पर गैर-प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की पहचान सुनिश्चित करने को कहा।
कठोर सर्दियों के दौरान कार्यों में बाधा न आए, विशेषकर बर्फबारी और दुर्गम क्षेत्रों में, इसके लिए मुख्य सचिव ने आवश्यक सामग्री का अग्रिम भंडारण (एडवांस डंपिंग) अनिवार्य बताया ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में भी कार्य निर्बाध जारी रह सके।
उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और जिला उपायुक्तों को bottlenecks हटाने के लिए निरंतर निगरानी रखने और कार्य निष्पादन की रफ्तार बनाए रखने के निर्देश दिए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव पीडीडी, शैलेन्द्र कुमार ने सभी परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों (PIAs) से जमीनी स्तर पर प्रगति तेज करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने पोल स्थापना के बाद कई घटकों पर समानांतर कार्य प्रारंभ करने पर जोर दिया और मारवाह, वाडवान, गुरेज व तंगधार जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में सामग्री के परिवहन व वितरण की विस्तृत जानकारी भी मांगी।
उन्होंने अवैध कनेक्शनों को तुरंत नियमित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया ताकि सरकारी राजस्व बढ़ सके और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति मिल सके।
पीईएसएल और एनटीपीसी से बात करते हुए उन्होंने कार्य की गति में तेजी लाने का आग्रह किया और आश्वस्त किया कि मंत्रालय से जैसे ही धनराशि उपलब्ध होगी, परियोजनाओं को उसके अनुरूप वित्तीय समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने एजेंसियों को सुनिश्चित माइलस्टोन तय करने और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी।
जेपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक गुरपाल सिंह ने विस्तृत प्रस्तुति में आरडीएसएस के चरण-1 के तहत हानि-न्यूनकरण, आधुनिकीकरण और स्मार्ट मीटरिंग पहलों की प्रगति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हानि-न्यूनकरण के तहत ₹4,709 करोड़ और स्मार्ट मीटरिंग के तहत ₹1,053 करोड़ की परियोजनाएँ इस चरण में पूरी की जानी हैं।
उन्होंने बताया कि कार्यों को कई पैकेजों में विभाजित कर जेपीडीसीएल, केपीडीसीएल, पीईएसएल और एनटीपीसी जैसी चार प्रमुख एजेंसियों को समय-सीमा में पूरा करने के लिए आवंटित किया गया है।
बैठक में बताया गया कि हानि-न्यूनकरण और आईटी/ओटी कार्यों में पिया-वार प्रगति इस प्रकार है—जेपीडीसीएल: 74%, केपीडीसीएल: 73%, पीईएसएल: (कश्मीर 57%, जम्मू 33%), एनटीपीसी: (कश्मीर 72%, जम्मू 31%)।
यह भी बताया गया कि एटी एंड सी हानियाँ 2022 के 58% से घटकर वर्तमान में लगभग 32% रह गई हैं, और इन्हें 2028 तक 12% तक लाने का लक्ष्य है। इसी प्रकार एसीएस-एआरआर गैप ₹3.11 से घटकर ₹1.29 हो गया है, जबकि बिलिंग दक्षता 56% से बढ़कर 69% और कलेक्शन दक्षता 75% से बढ़कर 94% हो गई है—जो बिजली क्षेत्र में वित्तीय स्थिरता व संचालन दक्षता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि है।